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देश में फिर शुरू हुई पॉलिमर नोट लाने की तैयारी, फायदे और नुकसान का आकलन कर रहा है RBI

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार भारत में पॉलिमर (प्लास्टिक) के नोट लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके फायदे-नुकसान का आकलन किया जा रहा है

Last Updated- June 06, 2026 | 9:15 AM IST
Indian Rupee
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को कहा कि पॉलिमर के नोट लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है और बैंकिंग नियामक इसके फायदे और नुकसान का आकलन कर रहा है। नीतिगत घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में जब उनसे ऐसे नोट लाने की संभावना तलाशने वाली खबरों के बारे में पूछा गया तो मल्होत्रा ​​ने कहा, पॉलिमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है। जो भी खबरें आई हैं, उनमें कुछ सचाई है।

भारत में अभी बैंक नोट छापने के लिए जिस कागज का इस्तेमाल हो रहा है, वह 100 फीसदी कपास से बनता है। मल्होत्रा ​​ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हम इसके फायदे और नुकसान की जांच कर रहे हैं और यह भी देख रहे हैं कि क्या ऐसा करना फायदेमंद होगा। यह अभी शुरुआती चरण में है। 

केंद्रीय बैंक की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक नकद और डिजिटल पेमेंट के तरीकों के इस्तेमाल और पसंद को समझने के लिए लोगों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के भुगतान व्यवहार पर एक सर्वे किया गया था। सर्वे के नतीजों से पता चला कि अब भी लोग नकदी के इस्तेमाल को प्राथमिकता देते हैं।

यह बात वित्त वर्ष 26 में चलन में रहे बैंक नोटों की जबरदस्त बढ़ोतरी से भी साफ होती है। मार्च 2026 के आखिर तक चलन में रहे बैंक नोटों की वैल्यू सालाना आधार पर 11.9 फीसदी बढ़कर 41.23 लाख करोड़ रुपये हो गई। संख्या के हिसाब से इसमें सालाना आधार पर 10.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 171.32 अरब हो गई। 

वैल्यू के हिसाब से कुल नोटों में 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 85.5 फीसदी थी, जो पिछले साल के 86 फीसदी से थोड़ी कम है। 10 रुपये और 20 रुपये के छोटे नोटों की हिस्सेदारी 0.7-0.7 फीसदी थी। रिपोर्ट में कहा गया है, संख्या के हिसाब से चलन में मौजूद कुल नोटों में 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा थी और उसके बाद 10 रुपये के नोटों का नंबर आता है।

सालाना रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में बैंक नोटों की कम मांग के कारण उस साल सिक्योरिटी प्रिंटिंग पर खर्च 4,875.2 करोड़ रुपये रहा जबकि इससे पिछले साल यह खर्च 6,372.8 करोड़ रुपये था।

पहले भी ऐसी कोशिशें की गई थीं। 2012 में तब की सरकार ने पांच शहरों में फील्ड ट्रायल के तौर पर पॉलिमर वाले 10 रुपये के एक अरब नोट लाने का फैसला किया था। तत्कालीन संप्रग सरकार ने कहा था कि पॉलिमर नोट लाने का मुख्य मकसद उनकी उम्र बढ़ाना था, न कि नकली नोटों की समस्या से निपटना। तकनीकी चुनौतियों की वजह से इस परियोजना को बंद कर दिया गया था।

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First Published - June 6, 2026 | 9:15 AM IST

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