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बेनामी सौदों की तय होगी सीमा!

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Last Updated- December 11, 2022 | 3:01 PM IST

केंद्र सरकार बेनामी सौदों को लेकर एक सीमा तय कर सकती है और इससे अधिक के इस तरह के सौदे का पता चलने पर उसे रद्द कर ऐसी संप​त्ति को जब्त किया जा सकता है। मौजूदा कानून में ऐसे सौदों पर किसी तरह की सीमा लगाने का प्रावधान नहीं है। 
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन कानून, 2016 के कुछ प्रावधानों की समीक्षा की जा रही है और बेनामी संपत्तियों पर रोक के लिए कानून को इसके अनुरूप बनाने के लिए नए सिरे से काम किया जा सकता है।’
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि समझा जाता है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मौजूदा कानून की कुछ विसंगतियों को दूर करने के लिए कुछ उपाय सुझाए हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके  कि इसे लागू करते समय किसी को बेवजह परेशान न किया जा सके।
उन्होंने कहा कि ऐसे सौदों, खास तौर पर बेनामी कानून के तहत उच्च मूल्य के सौदों पर सीमा लगाने के कुछ सुझाव दिए गए हैं। संसद के बजट सत्र में इन संशोधनों का प्रस्ताव किया जा सकता है।
कर की शब्दावली में 50 लाख रुपये और इससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री उच्च मूल्य के सौदों के दायरे में आती है। हालांकि एक सूत्र ने संकेत दिया कि इस मामले में सीमा ऊंची हो सकती है। 
इसके अलावा सीबीडीटी ऐसी बेनामी संपत्तियों को जब्त करने के लिए नई प्रक्रिया ला सकता है, ताकि ऐसे मालिकों को पकड़ा जा सके जो अनुचित संपत्ति सृजित करते हैं और उसे छिपाकर गुमनाम बने रहते हैं।
प्रस्तावित कदम सर्वोच्च न्यायालय के हाल में आए ऐतिहासिक फैसले के बाद उठाए जा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने बेनामी लेनदेन कानून में 2016 के संशोधन को पीछे की तारीख से लागू नहीं करने का फैसला सुनाया था और कानून में ऐसे लेनदेन को आपराधिक और जेल जैसी सख्त सजा वाले कुछ प्रावधानों को भी रद्द कर दिया था। इस फैसले से 25 अक्टूबर, 2016 को इस संशोधन के प्रभावी होने तक की गई सभी कार्रवाई खुद-ब-खुद दरकिनार हो गई।
बेनामी संपत्ति उसे कहते हैं जिसके वास्तविक लाभार्थी वे नहीं होते हैं जिनके नाम पर संपत्ति की खरीद की गई है। 
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 मई, 2019 तक 9,600 करोड़ रुपये मूल्य से अधिक की बेनामी संपत्तियों से जुड़े 2,100 से ज्यादा मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से अधिकांश नोटिस संशोधित नियम के लागू होने से पहले के सौदों से संबद्ध थे।
बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून 1988 में लागू हुआ था और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1 नवंबर, 2016 को इसमें संशोधन कर प्रभावी बनाया था। उसी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बड़े मूल्य के नोटों का चलन बंद करने की घोषणा की थी।
कानून में 2016 के संशोधन के बाद आयकर विभाग ने कंपनियों, अन्य फर्मों और लोगों को सैकड़ों नोटिस भेजे थे तथा उनके खिलाफ आपराधिक और जब्ती की कार्रवाई शुरू की थी। नए प्रावधान में पीछे की तारीख में हुए सौदों को भी कानून के दायरे में लाया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में उस प्रावधान को रद्द कर दिया जिसमें बेनामी सौदों से जुड़े मामलों में तीन साल तक की जेल की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। अदालत ने विभिन्न एजेंसियों द्वारा पीछे की तारीख से इस तरह के सौदों के लिए दंडात्मक कार्रवाई को अवैध करार दिया। अदालत ने स्थापित प्रक्रिया के बिना 28 साल पुराने बेनामी संपत्तियों के लेनदेन के खिलाफ कार्रवाई को असंवैधानिक बताया। 
कानून में 2016 में किए गए संशोधन से नकद लेनदेन, संपत्ति सौदे और जारी किए गए शेयर इसके दायरे में आ गए।
 

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First Published - September 25, 2022 | 10:00 PM IST

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