अर्थव्यवस्था

देश की आ​र्थिक सेहत के लिए सोने-चांदी का आयात बना चुनौती! ट्रेड डील से राहत की उम्मीद

एनालिस्ट का कहना है कि निकट भविष्य में वैश्विक व्यापार की सुस्ती भारत के निर्यात पर असर डाल सकती है।

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आशुतोष ओझा   
Last Updated- February 18, 2026 | 4:43 PM IST

देश की आ​र्थिक सेहत के मोर्चे पर सोने-चांदी के आयात ने चुनौती बढ़ाई है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस साल जनवरी में वस्तुओं का व्यापार घाटा तेजी से बढ़कर 35 अरब डॉलर हो गया। जकि दिसंबर 2025 में यह 25 अरब डॉलर पर था। यानी, करीब 10 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। व्यापार घाटा में आए इस तेज उछाल की एक बड़ी वजह देश में सोने और चांदी के आयात में आई तेजी है। सोने का आयात एक महीने में करीब 3 गुना और चांदी का आयात करीब 2.5 गुना बढ़ा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी में ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में मजबूती के कारण भारत में दोनों कीमती धातुओं का आयात तेजी से बढ़ा। इससे ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा पर बड़ा दबाव आया। हालांकि, कोर आयात ग्रोथ (तेल और सोना को छोड़कर) 10 फीसदी से घटकर 7 फीसदी पर दर्ज किया। यानी, कोर आयात कमोबेश ​स्थिर रहा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि हाल ही में हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद आगे अमेरिका को निर्यात बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने चिंता भी जताई कि सोने-चांदी की कीमतों में आगे तेजी से व्यापार घाटा और बढ़ सकता है।

कितना बढ़ा सोने-चांदी का आयात

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 में भारत का वस्तुओं का व्यापार घाटा तेजी से बढ़कर 35 अरब डॉलर हो गया। दिसंबर 2025 में यह 25 अरब डॉलर था। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह सोना और चांदी के आयात में तेज उछाल रहा।

सोना-चांदी के आयात से घाटा तेजी से बढ़ा है। एक महीने में सोने का आयात 4 अरब डॉलर से बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। यह दिसंबर 2025 के मुकाबले 192 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह चांदी का आयात एक महीने में बढ़कर 2 अरब डॉलर हो गया। जोकि दिसंबर के मुकाबले 16 फीसदी ज्यादा है। इसके चलते कुल आयात बढ़कर 71 अरब डॉलर पहुंच गया।

आंकड़ों के मुताबिक, हालांकि कोर घाटा (तेल और सोना को हटाकर) लगभग 11 अरब डॉलर पर स्थिर बना हुआ है। कोर आयात ग्रोथ 10% से घटकर 7% (3MMA के आधार पर) दर्ज की गई।

निर्यात घटा, लेकिन कोर आयात भी कम हुआ

एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में कुल निर्यात घटकर 37 अरब डॉलर रह गया। हालांकि अच्छी बात यह रही कि कोर आयात (तेल, सोना छोड़कर) भी घटा। सितंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच अमेरिका को निर्यात 6 फीसदी (YoY) सालाना घटा। हाल ही में हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद आगे अमेरिका को निर्यात बढ़ सकता है।

नुवामा रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा कि जनवरी में भारत के सामानों के निर्यात में सालाना आधार पर 0.6% की बढ़त हुई, जबकि दिसंबर में यह 1.8% थी। हालांकि, ट्रेंड के हिसाब से निर्यात ग्रोथ 6.6% YoY रही (दिसंबर में 1.7%), जिसमें बेस इफेक्ट का भी योगदान रहा। FY26 (अप्रैल-जनवरी) में नॉन-ऑयल निर्यात करीब 5% रहा, जो FY25 के 8% से कम है। यानी कुल मिलाकर निर्यात की असली रफ्तार अभी कमजोर मानी जा रही है।

किन सेक्टरों का प्रदर्शन कैसा रहा?

सपोर्ट देने वाले सेक्टर

  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात: FY26 YTD में करीब 30% (YoY)
  • मरीन प्रोडक्ट्स निर्यात 15% बढ़ा
  • दवाएं और फार्मा 6% बढ़ा
  • इंजीनियरिंग गुड्स 6% बढ़ा

धीमे पड़ने वाले सेक्टर

  • इंजीनियरिंग गुड्स: FY25 के 11% के मुकाबले FY26 में 4%
  • केमिकल्स: FY25 के 6% के मुकाबले FY26 में 2%
  • जेम्स और ज्वेलरी निर्यात 4% घटा
  • टेक्सटाइल लगभग स्थिर रहा
  • आयात में 19% की बढ़त, लेकिन वजह सोना

आगे क्या सोना खतरा बना रहेगा?

नुवामा के एनालिस्ट का कहना है कि निकट भविष्य में वैश्विक व्यापार की सुस्ती भारत के निर्यात पर असर डाल सकती है। हालांकि भारत-अमेरिका और भारत-यूरोप (EU) के साथ ट्रेड डील आने वाले समय में निर्यात को सहारा दे सकती हैं। इसके अलावा, रुपये में गिरावट से निर्यात को फायदा मिल सकता है और ट्रेड डेफिसिट को संभालने में मदद मिल सकती है। लेकिन सोने का बढ़ता आयात अभी भी ट्रेड डेफिसिट के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है।

एमके ग्लोबल के एनालिस्ट मानते हैं कि FY26 में CAD/GDP 1.1% और FY27 में CAD/GDP 1.2% रह सकता है। यानी, कुल मिलाकर भारत का बाहरी संतुलन अभी काफी संभला हुआ है। हालांकि, उन्होंने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि सोना-चांदी के आयात में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। ट्रेड डील की पूरी शर्तें अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, FY27 में सेवाओं के निर्यात की ग्रोथ धीमी हो सकती है।
लेकिन अगर US टैरिफ 18% तक घटता है, तो भारत के निर्यात को तुरंत फायदा मिल सकता है।

चीन और एशिया को निर्यात बढ़ने से राहत

एमके की रिपोर्ट का कहना है कि अमेरिका में टैरिफ बढ़ने के बाद भारत का निर्यात कुछ हद तक चीन और दूसरे एशियाई देशों की तरफ शिफ्ट हुआ। पिछले 5 महीनों में भारत का निर्यात तेजी से बढ़ा है। यह स्पेन को 80%, चीन को 58%, हॉन्गकॉन्ग को 34%, वियतनाम को 27%, और यूएई को 13% उछला है।

जनवरी 2026 में सेवाओं का व्यापार सरप्लस बढ़कर 24.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। दिसंबर 2025 के आंकड़े भी ऊपर संशोधित किए गए। FY26 में अब तक सेवाओं का सरप्लस 181 अरब डॉलर (18% बढ़त) रहा।

First Published : February 18, 2026 | 4:36 PM IST