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FY27 में निर्यात का नया रिकॉर्ड बनाने को तैयार भारत, डंपिंग पर लगेगी लगाम; बढ़ेगा घरेलू विनिर्माण: गोयल

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अनुमान के मुताबिक वृद्धि की इस रफ्तार से भारत का वस्तु और सेवाओं का निर्यात वित्त वर्ष 2027 में क्रमशः लगभग 515 अरब डॉलर और 470 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है

Last Updated- July 04, 2026 | 10:03 AM IST
Commerce minister Piyush Goyal
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल | फाइल फोटो

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने चालू वित्त वर्ष में वस्तु निर्यात 16-17 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। गोयल ने यहां ‘व्यापार बोर्ड’ की बैठक में कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि इस साल हमारा वस्तु निर्यात करीब 16-17 प्रतिशत और सेवा निर्यात 10-11 प्रतिशत बढ़ेगा।’ इस बैठक में सरकारी अधिकारियों, उद्योग संगठनों और निर्यात संवर्धन परिषदों ने हिस्सा लिया। 

एक मोटे अनुमान के मुताबिक वृद्धि की इस रफ्तार से भारत का वस्तु और सेवाओं का निर्यात वित्त वर्ष 2027 में क्रमशः लगभग 515 अरब डॉलर और 470 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। इससे भारत का कुल निर्यात चालू वर्ष के 1  लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के काफी करीब पहुंच जाएगा, जो शुक्रवार को हुई बीओटी की बैठक का एक मुख्य एजेंडा भी था। बीओटी व्यापार नीति पर एक शीर्ष सलाहकार संस्था है। बोर्ड की पिछली बैठक नवंबर 2025 में हुई थी।

इस साल का महत्त्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार ने सतत टेक्सटाइल, टेक्निकल टेक्सटाइल, परफॉर्मेंस अपैरल और मेडिकल टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसर को चिह्नित किया है। बैठक में निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशों को क्षेत्रीय विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़ने के लिए राज्य केंद्रित उत्पादन का खाका पेश किया गया।

बीओटी की बैठक में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का असरदार तरीके से इस्तेमाल करने, आयात का विकल्प तैयार करने और डंपिंग को रोकने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

भारत इस साल कम से कम दो और एफटीए लागू करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में सरकार ने असरदार तरीके से समझौतों का इस्तेमाल करने के लिए पांच-सूत्रीय कॉन्सेप्ट फ्रेमवर्क तैयार किया है। बैठक में इस फ्रेमवर्क पर भी चर्चा की गई।

एफटीए के इस्तेमाल के फ्रेमवर्क के तहत रणनीति में जिन क्षेत्रों में भारत पहले से ही उल्लेखनीय रूप से निर्यात कर रहा है, उन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाना और शुल्क का फायदा उठाना, तरजीही शुल्क मिले हुए सेक्टर में निर्यात का विविधीकरण करना, गैर शुल्क बाधाएं और आपूर्ति से जुड़ी खामियों को दूर करना शामिल है। 

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First Published - July 4, 2026 | 10:03 AM IST

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