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भारत की मैन्युफैक्चरिंग पर ब्रेक! 4 साल के निचले स्तर पर PMI

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कमजोर मांग, महंगाई और युद्ध का असर, ऑर्डर और उत्पादन घटे

Last Updated- April 03, 2026 | 9:15 AM IST
India Services PMI June 2026

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच नए ऑर्डर और उत्पादन में गिरावट के कारण मार्च में भारत के निजी क्षेत्र के विनिर्माण की वृद्धि 45 महीने के निचले स्तर पर आ गई। गुरुवार को जारी एचएसबीसी का इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मार्च में गिरकर 53.9 पर आ गया, जो फरवरी के 56.9 से कम है। एसऐंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित इन आंकड़ों से विनिर्माण क्षेत्र के मासिक परिवर्तन का पता चलता है। यह जून 2022 के बाद सूचकांक का सबसे निचला स्तर है।

एसऐंडपी ग्लोबल ने एक प्रेस बयान में कहा है, ‘मार्च में भारत के विनिर्माण उद्योग में वृद्धि पीछे चली गई। लागत के दबाव, कड़ी प्रतिस्पर्धा, बढ़ी हुई बाजार अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में युद्ध के मिले जुले असर से नए ऑर्डर कम हुए और उत्पादन में वृद्धि भी धीमी रही। फर्मों ने लागत में वृद्धि का दबाव भी झेला, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे तेज था।’ ताजा आंकड़ों में नए ऑर्डर का भारित औसत, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की डिलिवरी की अवधि और खरीद सूचकांक के स्टॉक फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 53.8 के आसपास ही रहा, जो पिछले महीने जारी हुआ था।

यह आंकड़ा 50 से ऊपर बना हुआ है। यह गतिविधि में विस्तार को दर्शाता है, जबकि इससे नीचे संकुचन को दर्शाता है। यह मुख्य आंकड़ा लगातार 53वें महीने विस्तार क्षेत्र में रहा है। एचएसबीसी की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘भारत का विनिर्माण पीएमआई मार्च में फरवरी के 56.9 से घटकर 53.9 रह गया, जो जून 2022 के बाद इसका सबसे निचला स्तर है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ी बाधाओं का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारतीय विनिर्माताओं पर भी इसका दबाव पड़ रहा है। उत्पादन और नए ऑर्डर में उल्लेखनीय रूप से कमी आई, जो कमजोर मांग और बढ़ी हुई अनिश्चितता का संकेत देता है।’

पीएमआई के दो प्रमुख उप घटकों नए ऑर्डर और उत्पादन की वृद्धि दर 2022 के मध्य के बाद से सबसे सुस्त रही। बाजार की स्थिति, लागत का दबाव और युद्ध के कारण आई वृद्धि में सुस्ती का असर सर्वे में नजर आ रहा है। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कुल मिलाकर कारोबारी गतिविधियों में पिछले 4 साल में सबसे सुस्त सुधार हुआ है। साथ ही प्रमुख आंकड़े 54.2 के दीर्घावधि औसत से नीचे आ गए हैं।

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First Published - April 3, 2026 | 9:15 AM IST

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