facebookmetapixel
Advertisement
किसानों को बड़ी राहत! सरकार ने प्याज की सरकारी खरीद कीमत 13.3% बढ़ाई, अब मिलेगा यह नया भावक्या कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस के बाद भी आपको हॉस्पिटल को देना पड़ा पैसा? एक्सपर्ट से जानिए इसकी असली वजहDividend Stocks: अगले हफ्ते एक्सिस बैंक, टाटा, JSW समेत 45 कंपनियां बाटेंगी बंपर मुनाफा, नोट करें रिकॉर्ड डेटटेलीग्राम पर सरकार का सख्त, फिल्मों-वेब सीरीज की पायरेसी रोकने के लिए दिया 15 दिन का अल्टीमेटममुफ्त शेयरों की बरसात! अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां दे रही हैं बोनस शेयर, नोट कर लें रिकॉर्ड डेटशेयर बाजार में धमाका: अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां दे रही हैं 1 के बदले 10 शेयर, नोट कर लें तारीख!यूपी सरकार ने FY27 के लिए तय किया ₹71,278 करोड़ का भारी-भरकम आबकारी लक्ष्य, पहले तीन महीने में रिकॉर्ड कमाईअब उत्तर प्रदेश से सीधे विदेश जाएगा आम, हॉट वेपर ट्रीटमेंट की व्यवस्था राज्य में ही करने जा रही योगी सरकारउत्तर प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कोल इंडिया और UPRVUNL के बीच हुआ बड़ा समझौताफार्मा कंपनियों को सरकार से बड़ी राहत, अब दवा की वास्तविक ओवरचार्जिंग पर ही होगी कार्रवाई

LPG की कीमत बढ़ने पर सरकार की सफाई: अभी भी सबसे सस्ता गैस यहां, उपभोक्ताओं को ज्यादा नुकसान नहीं

Advertisement

पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू एलपीजी सिलेंडर 29 रुपये महंगा हो गया है। साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत अब साल में केवल चार सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी

Last Updated- June 07, 2026 | 3:44 PM IST
LPG
फोटो क्रेडिट: PTI

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारत सरकार ने घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर अब 942 रुपये हो गई है।

हालांकि, इस बढ़ोतरी के बाद भी सरकार का कहना है कि दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले भारत में आज भी घरेलू रसोई गैस बेहद सस्ती मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में भारी उछाल आने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को वैश्विक महंगाई की मार से काफी हद तक बचा कर रखा गया है।

दो महीने में 89 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर, लागत 1600 के पार

घरेलू रसोई गैस की कीमतों में पिछले कुछ समय में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले बीते 7 मार्च को भी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये का इजाफा किया गया था। इस तरह देखा जाए तो पिछले दो महीनों के भीतर ही घरेलू गैस सिलेंडर कुल 89 रुपये महंगा हो चुका है।

मौजूदा संकट की असल वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल है। फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के बाद से वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस संकट के चलते भारत में एक घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई लागत (सच्ची कीमत) बढ़कर 1,600 रुपये से भी ऊपर जा चुकी है।

इस बढ़ोतरी से पहले तक सरकारी तेल कंपनियां हर घरेलू सिलेंडर की बिक्री पर करीब 703 रुपये का घाटा (अंडर-रिकवरी) उठा रही थीं। भारत अपनी LPG जरूरतों का करीब 60 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हमारी आयात लागत सीधे तौर पर ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ (CP) से जुड़ी होती है, जो इस ईंधन का वैश्विक पैमाना है। फरवरी के बाद से इस बेंचमार्क में करीब 46 प्रतिशत का भारी उछाल आया है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिख रहा है।

उज्ज्वला लाभार्थियों को बड़ा झटका! 

सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को मिलने वाली 300 रुपये की सीधी सब्सिडी को तो बरकरार रखा है, लेकिन इसके दायरे में बड़ी कटौती कर दी है। पिछले साल सरकार ने घोषणा की थी कि उज्ज्वला योजना के तहत साल में 9 सिलेंडरों पर सब्सिडी दी जाएगी। लेकिन अब इसे घटाकर सालाना केवल 4 रिफिल (सिलेंडर) तक सीमित कर दिया गया है।

सरकार का तर्क है कि एक सामान्य उज्ज्वला परिवार की सालभर की औसत खपत लगभग चार सिलेंडर ही होती है, इसलिए यह फैसला लिया गया है। इस व्यवस्था के तहत:

  • देश के 10.58 करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला लाभार्थियों को साल के पहले 4 सिलेंडरों पर 300 रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में मिलती रहेगी।
  • सब्सिडी के बाद इन परिवारों को सिलेंडर प्रभावी रूप से 642 रुपये का पड़ेगा।
  • चार से ज्यादा सिलेंडर लेने पर उन्हें भी सामान्य उपभोक्ताओं की तरह 942 रुपये प्रति सिलेंडर की कीमत चुकानी होगी।

वहीं, सामान्य परिवारों को भी बिना किसी सीधी सब्सिडी के, बाजार की वास्तविक लागत (1,600 रुपये से अधिक) के मुकाबले करीब 700 रुपये कम में सिलेंडर मिल रहा है।

Also Read: महंगाई की मार! रसोई गैस ₹29 और महंगी, दिल्ली में अब 942 रुपये का हुआ घरेलू LPG सिलेंडर

होर्मुज संकट के बीच कैसे बची रही घरेलू सप्लाई?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सबसे बड़ा असर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ रूट पर पड़ा है, जो दुनिया का एक प्रमुख समुद्री व्यापारिक रास्ता है। भारत के कुल LPG आयात का लगभग 54 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। इस संकट के बावजूद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा, जिसने इस रूट से अपनी ऊर्जा शिपमेंट को बिना किसी रुकावट के जारी रखा।

देश में रसोई गैस की किल्लत न हो, इसके लिए सरकार ने दोतरफा रणनीति अपनाई:

  1. घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: देश के भीतर LPG का उत्पादन 60 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दिया गया। पहले जहां रोजाना करीब 32,000 टन गैस का उत्पादन होता था, उसे बढ़ाकर 52,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया।
  2. आयात में बदलाव: भारत ने केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों से LPG का आयात शुरू किया।

इसके अलावा, संकट के समय गैस की बर्बादी और कालाबाजारी रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए गए। घरेलू सिलेंडरों के कमर्शियल इस्तेमाल को रोकने के लिए ‘OTP आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन’ व्यवस्था को मजबूत किया गया। साथ ही, जहां पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध थी, वहां उपभोक्ताओं को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि रसोई गैस को सुरक्षित रखा जा सके।

कमर्शियल और घरेलू गैस के दामों में जमीन-आसमान का अंतर

घरेलू और कमर्शियल (व्यावसायिक) गैस सिलेंडरों के बीच का अंतर समझकर यह आसानी से जाना जा सकता है कि सरकार आम जनता पर कितना कम बोझ डाल रही है। होटलों और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाला 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर पूरी तरह से बाजार की कीमतों पर निर्भर करता है और इसकी कीमतें हर महीने बदलती हैं।

पश्चिम एशिया संकट के बाद कमर्शियल सिलेंडर के दामों में पांच बार बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3,113.50 रुपये तक पहुंच गई है। यानी कमर्शियल गैस खरीदने वालों को लगभग 164 रुपये प्रति किलो की दर से भुगतान करना पड़ रहा है। इसके उलट, इस नए बदलाव के बाद भी देश के आम परिवारों को घरेलू LPG महज 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिल रही है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में ट्रांसपोर्टेशन और स्थानीय डिस्ट्रीब्यूशन खर्च की वजह से खुदरा कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर देखने को मिल सकता है।

तेल कंपनियों को हुए भारी घाटे की भरपाई करेगी सरकार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के आसमान छूने और घरेलू स्तर पर दाम नियंत्रित रखने की वजह से सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर आर्थिक बोझ बहुत ज्यादा बढ़ गया था। बीते वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू LPG की बिक्री पर कुल अंडर-रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य का अंतर) बढ़कर करीब 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो इससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपये थी।

कंपनियों के इस भारी-भरकम नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि कीमतों में की गई यह मामूली बढ़ोतरी वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से आम परिवारों को बचाने और पूरे देश में बिना किसी रुकावट के कुकिंग गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है।

(PTI के इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - June 7, 2026 | 3:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement