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MSME निर्यातकों को बड़ी राहत देने की तैयारी, नकदी संकट दूर करने के लिए नया फाइनेंस ढांचा बनाएगी सरकार

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सरकार एमएसएमई निर्यातकों के ९० दिनों के नकदी संकट को दूर करने और पश्चिम एशिया विवाद के असर से बचाने के लिए नई वित्त व्यवस्था बनाएगी

Last Updated- June 30, 2026 | 10:02 PM IST
Rupees
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक उपयुक्त निर्यात वित्त व्यवस्था बनाने की संभावना तलाशेगी। यह निर्णय वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), उद्योग और निर्यात संवर्धन परिषदों के परामर्श से लिया जाएगा।

मंगलवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में उद्योग द्वारा उठाई गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए एमएसएमई सचिव भारत खेड़ा ने कहा कि निर्यात वित्तपोषण निश्चित रूप से एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर विचार करने की आवश्यकता है। खेड़ा ने कहा, ‘हम उद्योग और वित्तीय सेवा विभाग के साथ मिलकर इस पर काम कर सकते हैं। आज एमएसएमई के कई सदस्य निर्यात संवर्धन परिषदों के भी सदस्य हैं, और हम निश्चित रूप से निर्यात के लिए धन की एक व्यवस्था बना सकते हैं।’

एक उद्योग प्रतिनिधि ने बताया कि एमएसएमई निर्यातकों को अपने घरेलू आपूर्तिकर्ता को 45 दिन में भुगतान करना होता है, जबकि निर्यात से मिलने वाली आय का वास्तविक भुगतान तब होता है, जब विदेश में माल पहुंच जाता है। इसकी वजह से 90 दिन के लिए नकदी कम हो जाती है। उद्योग प्रतिनिधि ने इस असंतुलन को दूर करने के लिए वित्तपोषण की व्यवस्था पर विचार करने का आग्रह किया। उसके बाद अधिकारी का यह सुझाव आया है।

खेड़ा ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण हुए व्यवधानों से निर्यात की कुछ खेप और नकदी की आवक पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कि सरकार ने एमएसएमई को नकदी और कार्यशील पूंजी की चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए पहले ही आपातकालीन क्रेडिट गारंटी योजना शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकट से उत्पन्न लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर करने के लिए राजस्व विभाग और शिपिंग अधिकारियों के साथ भी काम किया है।

सचिव ने कहा कि उद्यमों को आगे बढ़ाने में सस्ते धन तक पहुंच महत्त्वपूर्ण मसला बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना से लगभग 13 लाख करोड़ रुपये की गारंटी देने का प्रावधान हुआ है, जिससे क्षेत्र में ऋण के प्रवाह में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले जहां एमएसएमई को बैंक ऋण लगभग 10 लाख करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 37 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

नकदी के दबाव को कम करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए खेड़ा ने कहा कि सरकार ने एमएसएमई के लिए आपातकालीन क्रेडिट गारंटी योजना पहले ही शुरू कर दी है। इससे 100 प्रतिशत गारंटी कवर और मौजूदा स्वीकृत कार्यशील पूंजी सीमाओं पर 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण मिलता है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पहले ही 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक दिया जा चुका है।

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First Published - June 30, 2026 | 10:02 PM IST

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