केंद्र सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रथम चरण में करीब 500 जिलों की पहचान करेगी। मामले के जानकार लोगों के मुताबिक जिला स्तरीय निर्यात संवर्द्धन पहल के अंतर्गत प्रमुख तौर पर लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को विशेष तौर पर मदद दी जाएगी। हाल ही में इस योजना की रूपरेखा पर उद्योग व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ की बैठक में चर्चा की गई थी।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अभी भारत का निर्यात 100 से भी कम जिलों तक सीमित है जबकि लगभग हर जिले में निर्यात संभावित उत्पाद व क्षेत्र हैं। प्रस्तावित योजना का मकसद उन जिलों की पहचान करके देश में निर्यात का आधार बढ़ाना है जो नए निर्यात केंद्र के तौर पर उभर सकते हैं।
लोगों ने बताया कि इस योजना के तहत जिन जिलों में एमएसएमई का निर्यात में आधे से ज्यादा योगदान है, वहां उद्योग की मदद करने, मार्केट तक पहुंच आसान बनाने और नियामकीय रुकावटों को दूर करने के लिए विशेष अधिकारी तैनात किए जाएंगे। इस सिलसिले में वाणिज्य मंत्रालय को ईमेल भेजा गया था लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला था।
सूत्रों के अनुसार सरकार पूरी तरह से सरकारी कोष से विेशेष क्षेत्र वार गुणवत्ता नियंत्रक प्रयोगशाला स्थापित करने पर भी विचार कर रही है। ये प्रयोगशालाएं निर्यात विेशेषकर एमएसएमई के लिए उत्पाद परीक्षण और गुणवत्ता आंकलन की सविधाएं देंगी। इससे एमएसएमई बिना किसी वाणिज्यिक रुकावट के ये सेवाएं आसानी से उपलब्ध कर सकेंगी।
वाणिज्य मंत्रालय निर्यातकों की विदेशी बाजारों की नियामकीय जरूरतों को पूरा करने के लिए निर्यात के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र को हासिल करने की लागत पर कुछ राशि या रियायत देने की योजना बना रही है। जानकारों के मुताबिक इनमें क्वालिटी, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस और फ़ूड सेफ़्टी से जुड़े सर्टिफ़िकेशन शामिल हो सकते हैं।
केंद्र सरकार एक्सपोर्ट लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के लिए बंदरगाहों से दूर स्थित व्यवसायों को आर्थिक मदद देने पर विचार कर रही है। जानकारों ने बताया कि ऐसे जिलों में कंपनियों को होने वाले ज्यादा ढुलाई खर्च की भरपाई के लिए सब्सिडी का प्रस्ताव है। जानकारों के अनुसार वाणिज्य मंत्रालय के अगले तीन से चार महीनों में जिला निर्यात पहल से जुड़ी इन योजनाओं की घोषणा करने की उम्मीद है।