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उत्पादन ठप करने की तैयारी में सूती धागा मिलें

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Last Updated- December 11, 2022 | 4:27 PM IST

कपास की कीमतों में वृद्धि, परिधान उद्योग द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण धागे की मांग में घटने और उसका स्टॉक बढ़ने के मद्देनजर देश भर की सूती धागा मिलें सोमवार से उत्पादन बंद करने की योजना बना रही हैं। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी।

पिछले साल अगस्त की तुलना में इस साल अगस्त में कपास की कीमतों में 60 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध और कोविड के कारण कमजोर मांग के चलते निर्यात में गिरावट से परिधान उद्योग पहले से ही जूझ रहा है। 

तामिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को सोमवार से उत्पादन बंद करने और मौजूदा धागों के ऑर्डर को बचे हुए स्टॉक से पूरा करने का आग्रह किया है। सूत्रों का कहना है कि गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य भी इस महीने के अंत तक उत्पादन या तो पूरी तरह से बंद कर देंगे या उत्पादन में और कमी लाएंगे। 

तामिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन (तसमा) के मुख्य सलाहकार के वेंकटचलम ने कहा, ‘कपास बाजार में धागे की ऊंची कीमतें और कमजोर मांग के कारण मिलों को नुकसान हो रहा  है। इसकी वजह से उद्योग ने पहले से ही 40 फीसदी उत्पादन कम कर दिया है। बावजूद इसके कोई राहत नहीं मिल रही है और अब मिलें पूरी तरह से उत्पादन ठप करने जा रही हैं।’ 5 करोड़ तकली (स्पिंडल) के साथ धागे की कताई करने के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। देश की बात करें तो कुल क्षमता का करीब 48 फीसदी उत्पादन तामिलनाडु में होता है।

गुजरात की बालकृष्ण स्पिनटेक्स के प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार रायचूरा के अनुसार कपास की कमी के कारण सभी 90 कताई मिलें 50 फीसदी क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं। रायचूरा कहते हैं, ‘पिछले साल की समान अवधि से इस बार कपास की उपलब्धता में तकरीबन 25-30 फीसदी की कमी आई है। अगर हालात नहीं सुधरते हैं तो अधिकतर मिलें 1 सितंबर से बंद हो सकती हैं।’ गुजरात में 18 से 20 लाख तकली के कताई की क्षमता होने का अनुमान है।

कपास की कीमतों में वृद्धि के अलावा पिछले तीन महीनों में घागे के दाम में करीब 16 फीसदी की कमी आई है। मई 2022 में धागे का दाम रिकॉर्ड 450 रुपये प्रति किलो के स्तर पर था लेकिन अब यह 16 फीसदी नीचे आ चुका है। यह वृद्धि 2020 में 220 रुपये प्रति किलो के निम्न औसत मूल्य से थी। परिधान उद्योग ने भी कहा है कि उन्होंने पिछले कुछ महीनों में अपने उत्पादन 70 फीसदी तक कम कर दिए हैं। 

तिरुपुर एक्सपोर्टर्स ऐंड मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष एम पी मुथुरतिनम कहते हैं, ‘मई महीने के दौरान धागे की कीमतें बढ़कर 450 रुपये प्रति किलो तक हो गई थीं। कीमत में तेजी के कारण परिधान उद्योग को ऑर्डर की पुष्टि करने में परेशानी हो रही थी। लेकिन पिछले दो महीनों से धागा मिलों ने दाम में औसतन 70 रुपये प्रति किलो तक कमी की है।’ परिधान उद्योग द्वारा उत्पादन में कटौती करने से स्वाभाविक रूप से नौकरियों के नुकसान के अलावा कताई, बुनाई, रंगाई जैसे उद्योगों पर भी प्रभाव पड़ेगा। 

परिधान उद्योग के सूत्रों के मुताबिक कोविड के दौरान ऑर्डर में कटौती, रूस-यूक्रेन युद्ध और ग्राहकों की ओर से कम खरीदारी के कारण मांग में कमी आई है। मुथुरतिनम ने कहा कि सूती धागों की ऊंची कीमत के कारण रेयान, पॉलिएस्टर जैसे अन्य विकल्पों को अना रहे हैं। चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे हमारे प्रतिस्पर्धी देशों में उत्पादन खर्च यहां से 30 फीसदी कम हैं। अगर सूती धागों की कीमत वापस सामान्य हो जाती है जो हमें ऑर्डर मिलने लगेंगे और बाजार में मुकाबला कर सकते हैं।
 

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First Published - August 22, 2022 | 10:07 AM IST

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