अर्थव्यवस्था

राज्यों को मिलेगा हेल्थ–नेशनल सिक्योरिटी सेस का हिस्सा, पान मसाला जैसे उत्पाद होंगे महंगे

नैशनल सिक्योरिटी सेस केवल पान मसाला जैसे नुकसानदेह सामान पर लागू होगा और आवश्यक वस्तुओं पर नहीं।

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मोनिका यादव   
Last Updated- December 05, 2025 | 11:11 AM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हेल्थ सिक्योरिटी से नैशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025 लोकसभा में चर्चा के लिए पेश करते हुए कहा कि उपकर से प्राप्त राजस्व को स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं पर खर्च करने के लिए राज्यों के साथ साझा किया जाएगा। यह शुल्क केवल पान मसाला जैसे नुकसानदेह सामान पर लागू होगा और आवश्यक वस्तुओं पर नहीं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित शुल्क नुकसानदायक सामानों पर उपकर है, न कि किसी आवश्यक वस्तु पर। उन्होंने कहा कि इसका पहला मकसद पान मसाला जैसे उत्पादों के सेवन से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है, जिनके हानिकारक प्रभाव साफ हैं।

पान मसाले की कीमत बढ़ेगी

उन्होंने कहा, ‘यह उपकर लगाने से पान मसाले की कीमत बढ़ेगी। हमारा मानना है कि इससे खपत कम होगी। इसका उद्देश्य एक निवारक के रूप में काम करना है।’ इसका दूसरा मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए सतत निवेश की जरूरत है। महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए धन जुटाने के मकसद से इसकी डिजाइन बनाई गई है, जिसमें आम नागरिकों द्वारा आवश्यक खपत की वस्तुओं पर इसका बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने जोर दिया कि उपकर से मिलने वाला राजस्व सामान्यतया केंद्र सरकार रखती है, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के लिए राज्यों के साथ इस राजस्व को साझा किया जाएगा। इससे राज्य जागरूकता अभियान और इस तरह के कार्यक्रम चला सकेंगे।

उपकर का एक हिस्सा राज्यों को देंगे

उन्होंने कहा, ‘यह शुल्क उपकर के रूप में है, लेकिन हम इसका एक हिस्सा राज्यों को देंगे। हालांकि वह धन स्वास्थ्य पर ही खर्च किया जा सकेगा।’वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की संपूर्णता संबंधी चिंताओं को लेकर उन्होंने कहा कि उपकर से जीएसटी ढांचा कमजोर नहीं होगा, क्योंकि पान मसाला पहले से ही नुकसानदायक वस्तु के रूप में वर्गीकृत है। जीएसटी के तहत इस तरह की वस्तुओं पर अधिकतम अनुमति प्राप्त दर 40 प्रतिशत है, जिसमें जीएसटी और मुआवजा उपकर शामिल है।

उधर संसद ने गुरुवार को सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल 2025 पारित कर दिया है, जिसे राज्यसभा से पारित कर लोकसभा को वापस भेजा गया है। यह विधेयक लागू होने पर तंबाकू पर मौजूदा 40 प्रतिशत से ऊपर उत्पाद शुल्क लगाया जा सकेगा।

First Published : December 5, 2025 | 11:11 AM IST