शहरी गरीबी से एफएमसीजी को झटका

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 3:11 AM IST

कोविड-19 वैश्विक महामारी की दूसरी लहर और संक्रमण के दैनिक मामलों में कमी आई है लेकिन शहरी गरीबों के संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। कोविड की लगाता दो लहरों के बाद तमाम लोगों की नौकरी चली गई और उन्हें आय का नुकसान हुआ है। विशेष तौर पर दूसरी लहर ने गरीबों को तगड़ा झटका दिया है। इस दौरान चिकित्सा एवं वित्तीय सहायता के बिना गरीबों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।

रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियों के लिए इसका मतलब एक महत्त्वपूर्ण श्रेणी में गंभीर संकट पैदा होना है। इस लिहाज से गौर किया जाए तो एफएमसीजी कंपनियों की कुल बिक्री में शहरी क्षेत्र का योगदान करीब 60 से 65 फीसदी होता है। बाजार अनुसंधान एजेंसी नीलसनआईक्यू के अनुसार, शेष 35 से 40 फीसदी बिक्री ग्रामीण क्षेत्रों से आती है।  विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी बिक्री का करीब आधा हिस्सा अथवा कुल बिक्री का करीब 30 फीसदी हिस्सा शहरी गरीबों से आता है। विशेष तौर पर खाद्य कंपनियों के मामले में ऐसा देखा गया है। जबकि होम एवं पर्सनल केयर कंपनियों की कुल बिक्री में शहरी गरीबों का योगदान करीब 20 फीसदी है। उनकी करीब एक तिहाई शहरी बिक्री इन्हीं तबकों से आती है।

यही कारण है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी से प्रभावित शहरी गरीबों के लिए नीतिगत उपायों का अभाव इन कंपनियों के लिए चिंता का विषय है।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (जीसीपीएल) के मुख्य कार्याधिकारी (भारत एवं सार्क) सुनील कटारिया ने कहा, ‘शहरी गरीबों के लिए कोई सामाजिक सुरक्षा अथवा रोजगार गारंटी की योजना नहीं है जबकि ग्रामीण गरीबों के लिए ऐसे कई उपाय किए गए हैं। पिछले साल कोविड संबंधी व्यवधान के कारण शहरी इलाकों से बड़ी तादाद में गरीबों ने अपने गांव की ओर पलायन किया था। निश्चित तौर पर शहरी गरीबों की मदद के लिए नीतिगत स्तर पर कुछ उपाय करने की आवश्यकता है।’ 

नीलसनआईक्यू ने मई में संकेत दिया था कि वह कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण विभिन्न श्रेणियों की खपत में गिरावट पर करीबी नजर रख रही है। करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये का एफएमसीजी बाजार मार्च 2021 तिमाही को 9.4 फीसदी की सकल वृद्धि दर के साथ अलविदा किया।

उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि दूसरी लहर के मद्देनजर अप्रैल से जून की अवधि में वृद्धि दर घटकर 5 से 6 फीसदी रहने की आशंका है। हालांकि जुलाई से सितंबर की अवधि में कुछ सुधार दिखने की उम्मीद है और एफएमसीजी की वृद्धि दर 10 से 15 फीसदी तक पहुंच सकती है।

पारले प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा, ‘मैं देख रहा हूं कि अनलॉक की प्रक्रिया से शहरी क्षेत्रों में गरीबों को थोड़ी राहत मिली है। कामकाज सुचारु होने के साथ ही लोगों की मांग भी बढ़ेगी जिससे गरीबों को कुछ राहत मिलेगी। इनमें से कई तो दिहाड़ी मजदूर हैं। हालांकि महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार ने शहरी गरीबों के कल्याण के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है।’

डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि एफएमसीजी कंपनियां शहरी गरीबों की बहुतायत वाले क्षेत्रों में छोटे पैक को आगे बढ़ा सकती हैं।

First Published : June 29, 2021 | 11:41 PM IST