केयर रेटिंग्स की सहायक इकाई गलत जानकारी मुहैया कराने की वजह से बाजार नियामक सेबी की जांच के दायरे में आ गई है। इस जानकारी में कहा गया कि दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) अधिग्रहण के लिए भारतीय ऋणदाताओं को जारी किए गए ओकट्री के बॉन्ड ट्रिपल ‘ए’ रेटिंग के हैं।
इस घटनाक्रम से नजदीकी से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि डीएचएफएल के अन्य बोलीदाता अजय पीरामल से पत्र मिलने के बाद सेबी ने यह सुनिश्चित करने के लिए रेटिंग कंपनियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा कि ओकट्री बॉन्डों के लिए सर्वाधिक रेटिंग के पीछे क्या वजह थी। बाजार नियामक ने पाया कि केयर की सहायक इकाई ने ओकट्री अधिग्रहण प्रस्ताव को रेटिंग दी थी, लेकिन बॉन्डों को नहीं। हालांकि ऋणदाताओं के लिए यह प्रस्ताव ओकट्री द्वारा इस तरह से पेश किया गया था कि जिससे कि उच्चतम रेटिंग मिले।
केयर रेटिंग्स के एक अधिकारी ने कहा कि ओकट्री को कोई रेटिंग नहीं दी गई, लेकिन उसकी सहायक इकाई द्वारा उठाए गए कदम पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
ऋणदाताओं को भेजे अपने पत्र में ओकट्री ने कहा था कि उसे वित्तीय लेनदारों को जारी किए जाने वाले 21,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित एनसीडी के लिए ऊंची रेटिंग की उम्मीद है। साथ ही, उसने प्रस्तावित बॉन्डों की यह कहते हुए पीरामल के साथ तुलना की कि पीईएल बॉन्डों को ‘एए’ से ज्यादा के्रडिट रेटिंग नहीं मिलेगी। इन रेटिंग के लिए ऋणदाताओं को कोई वजह नहीं बताई गई थीं। सेबी के नियमों के अनुसार, रेटिंग कंपनियां तब तक किसी योजना को रेटिंग का संकेत नहीं दे सकती हैं, जब तक कि रेटिंग नहीं दी जाए, क्योंकि किसी सांकेतिक रेटिंग से निवेशकों को गुमराह किया जा सकता है।
बगैर किसी औचित्य के रेटिंग में असमानता से पीरामल द्वारा उस रेटिंग कंपनी के खिलाफ सेबी के समक्ष दायर आधिकारिक शिकायत को बढ़ावा मिला, जिसके नाम का खुलासा ओकट्री द्वारा नहीं किया गया था। पीरामल ने सेबी के अलावा, बैंकिंग नियामक आरबीआई के पास भी शिकायत की थी और कहा था कि ओकट्री कैपिटल द्वारा डीएचएफएल का अधिग्रहण नैशनल हाउसिंग बोर्ड (एनएचबी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा निर्धारित पूंजी पर्याप्तता अनुपात मानकों को पूरा करने में सफल नहीं होगा।
ऋणदाताओं द्वारा ओकट्री की समाधान योजनाओं को सहमति दिए जाने के कुछ दिन बाद ही सेबी और आरबीआई को पत्र भेजे गए थे। जहां ओकट्री ने डीएचएफएल को एक प्रमुख इकाई बनाए रखे जाने का प्रस्ताव रखा, वहीं पीरामी की योजना डीएचएफएल को अपने वित्तीय सेवा व्यवसाय के साथ मिलाने की है जिससे डीएचएफएल का इक्विटी आधार बढ़ाया जा सके। इन बोलियों के अनुसार, पीरामल की पेशकश ओकट्री के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है और इसे लेकर वोटिंग 14 जनवरी को समाप्त होगी। लेकिन ओकट्री ने समय-सीमा के बाद 1,700 करोड़ रुपये की पेशकश की थी और बीमा उपक्रमों की बिक्री के जरिये अन्य 1,000 करोड़ रुपये बैंकों को देने का वादा किया।