देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी सत्यम कंप्यूटर्स के भविष्य और साख को लेकर अनिश्चितता का दौर बना हुआ है। इस बीच, कंपनी के तीन और स्वतंत्र निदेशकों ने इस्तीफा दे दिया है।
ताजा इस्तीफा एम. राममोहन राव का है, जबकि कृष्णा जी. पलेपू और विनोद धाम ने भी इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के चेयरमैन रामलिंग राजू के बेटों की कंपनी के अधिग्रहण की घोषणा से शुरू हुआ विवाद पहले ही कंपनी की साख को प्रभावित कर रहा था।
वर्ल्ड बैंक भी कंपनी की सेवाओं पर 8 साल के लिए पाबंदी लगा चुका है। इससे पहले 25 दिसंबर को स्वतंत्र निवेशक मंगलम श्रीनिवासन के इस्तीफे की पुष्टि की गई थी।
खास बात यह कि राव ने ही 16 दिसंबर को सत्यम की उस बोर्ड बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें कंपनी चेयरमैन रामलिंग राजू के बेटों की दो कंपनियों के अधिग्रहण का फैसला किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, राममोहन राव ने अपना इस्तीफा भेजकर तत्काल प्रभाव से इसे लागू करने को कहा है। हालांकि कंपनी ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अब कंपनी में केवल दो स्वतंत्र निदेशक-वी.एस. राजू और टी.आर. प्रसाद ही रह गए हैं।
मायटास सौदे के बाद शुरू हुए विवाद की वजह से स्वतंत्र निवेशक कंपनी से इस्तीफा दे रहे हैं। इस बीच, कंपनी की ओर से कहा गया है कि ऋणदाता संस्थानों के पास गिरवी रखे गए राजू और उनके परिवार के शेयरों की बिकवाली के चलते कंपनी में उनकी हिस्सेदारी पहले ही कम हो चुकी हो।
दरअसल, राजू की ओर से कंपनी को बताया गया कि उनके पूरे शेयर कर्ज देने वाली संस्थाओं के पास वर्ष 2006 से ही गिरवी थे।
सत्यम के तीन और स्वतंत्र निदेशकों ने दिया इस्तीफा
प्रवर्तकों की हिस्सेदारी घटने के आसार
प्रवर्तकों ने शेयर गिरवी रख लिया है कर्ज