मंदी की वजह से संकट झेल रहे होटल उद्योग को सरकार की ओर से सेवा कर में 2 फीसदी की कटौती किए जाने से थोड़ी राहत तो मिली है, लेकिन कारोबारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।
होटल कारोबारियों का कहना है कि केवल 2 फीसदी की कटौती से पर्यटकों को होटलों तक खींचना मुश्किल होगा। गौरतलब है कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को सेवा कर को 12 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने का ऐलान किया था। इसका मकसद सेवा क्षेत्रों, खासकर होटल कारोबार को राहत पहुंचाना था।
मौजूदा समय में होटल और रिसॉर्ट में सेवा कर के तौर पर 12.36 फीसदी वसूला जाता है। अगर इसे विस्तार से समझा जाए, तो 2000 रुपये के बिल पर जहां ग्राहकों को 12.36 फीसदी की दर से 247 रुपये सेवा कर चुकाना पड़ता था, वहीं अब 10.36 फीसदी की दर से उन्हें 207 रुपये का सेवा कर देना होगा। यानी करीब 40 रुपये की बचत होगी।
होटल कारोबारी सरकार के इस कदम का स्वागत तो करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि इतने से सूने पड़े होटलों की रौनक लौटने वाली नहीं है। हिल्टन इंडिया के चेयरमैन लेनी मीनेजेस का कहना है कि कर में किसी भी तरह की छूट स्वागतयोग्य है, लेकिन इससे ग्राहकों को बहुत कम फायदा होगा।
उनके मुताबिक, इस कटौती के दम पर ग्राहकों को होटलों की ओर आकर्षित करने में खास मदद नहीं मिलेगी। मंदी की वजह से विदेशी पर्यटकों का आना कम हो गया है, वहीं घरेलू पर्यटक भी दूर हो रहे हैं।