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फ्यूचर सौदे की राह हुई मुश्किल

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Last Updated- December 12, 2022 | 8:52 AM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) को रिलायंस रिटेल के साथ 24,713 करोड़ रुपये के सौदे के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आज निर्देश दिया। रिलायंस-फ्यूचर सौदे पर अमेरिका की ई-कॉमर्स दिग्गज एमेजॉन ने आपत्ति जताई है। इसे लेकर उसने अदालत में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति जेआर मिधा ने कहा कि एमेजॉन के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल अंतरिम आदेश पारित करने की जरूरत है। न्यायाधीश ने कहा, ‘प्रतिवादियों (एफआरएल) को निर्देश दिया गया है कि सुरक्षित आदेश की घोषणा तक रिलायंस-फ्यचूर सौदे पर यथास्थिति को बनाए रखें।’
एमेजॉन ने इस सौदे पर सिंगापुर के आपातकालीन पंचाट मंच के अंतरिम आदेश को लागू कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
पंचाट ने फ्यूचर रिटेल को रिलायंस रिटेल के साथ उसके 24,713 करोड़ रुपये के सौदे पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश दिया था।
एमेजॉन ने किशोर बियाणी की अगुआई वाले फ्यूचर समूह को मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस रिटेल के साथ सौदा पूरा करने के लिए कदम उठाने से रोकने की मांग की थी।
उच्च न्यायालय ने लगातार चार दिनों तक इस मामले की सुनवाई करने के बाद मुख्य याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा। न्यायालय ने अन्य सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन मामलों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखें, जो सिंगापुर के पंचाट के आदेश के विपरीत हैं।
न्यायालय ने इन अधिकारियों को वर्तमान स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। एमेजॉन के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम भारतीय कानून व्यवस्था का सम्मान करते हैं और दिल्ली उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश की सराहना करते हैं।’
उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया पाया गया कि आपातकालीन पंचाट मध्यस्थ निर्णय का एक मंच है और उसने एफआरएल के खिलाफ सही तरीके से कार्रवाई की है।
अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट था कि आपातकालीन मध्यस्थ के 25 अक्टूबर, 2020 के आदेश पंचाट व सुलह अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत लागू करने योग्य है और उनके खिलाफ अपील भी की जा सकती है।
उच्च न्यायालय ने एफआरएल को निर्देश दिया कि वह 25 अक्टूबर, 2020 से अब तक रिलायंस के साथ समझौते के संबंध में उसके द्वारा उठाए गए कदमों और कार्यों के बारे में एक हलफनामा दायर करे।
उच्च न्यायालय ने इससे पहले एमेजॉन की याचिका पर एफआरएल, फ्यूचर कूपन प्राइवेट लिमिटेड (एफसीपीएल), फ्यूचर के संस्थापक बियाणी व अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया था और याचिका पर जवाब मांगा था। इससे पहले एमेजॉन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मध्यस्थता अदालत के आदेश का जानबूझकर पालन नहीं करने को लेकर फ्यूचर के संस्थापक किशोर बियाणी को गिरफ्तार करने तथा उनकी संपत्तियां जब्त करने की मांग की थी। एमेजॉन ने मांग की थी कि उसकी सहमति के बिना फ्यचूर समूह पर एफआरए रिटेल की संपत्तियों को बेचने पर रोक लगाई जाए।

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First Published - February 2, 2021 | 11:21 PM IST

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