वाहन उद्योग का आर्थिक सुधार पर रहेगा जोर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 10:18 AM IST

यदि किसी ऐसे वर्ष पर विचार किया जाए जिसमें भारत का निर्माण क्षेत्र, खासकर वाहन उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है, जो वह 2020 माना जाएगा। इस महीने के शुरू में, एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्घि का अनुमान पिछले -9 प्रतिशत से बदलकर -7.7 प्रतिशत कर दिया। बढ़ती मांग और कोविड-19 की घटती रफ्तार की वजह से वृद्घि के इस अनुमान में थोड़ा सुधार किया गया है। अगले वित्त वर्ष 2021-22 के लिए, एसऐंडपी ने वृद्घि सुधरकर 10 प्रतिशत पर रहने का अनुमान व्यक्त किया है।
 
वाहन कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि 2021 में बड़ा सुधार आर्थिक वृद्घि पर निर्भर होगा, जिससे ईंधन खपत पर भी असर दिखेगा।  मारुति सुजूकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव भारत के वाहन बाजार की आगामी राह को लेकर आशान्वित हैं और उनका कहना है कि नया वर्ष 2020 के मुकाबले बेहतर होगा, लेकिन उन्होंने किसी तरह की भविष्यवणी करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि अगला वर्ष इस साल के मुकाबले बेहतर रहेगा, लेकिन कितना बेहतर रहेगा, बिक्री के लिए संभावित लक्ष्य क्या है, इन सबके बारे में हमने अभी कोई ठोस आकलन नहीं किया है।’
 
हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड (एचएमआईएल) भी अगले साल कुछ आर्थिक सुधारों को लेकर आशान्वित है, जिससे वाहन उद्योग को मदद मिलेगी। एचएमआईएल के एमडी एवं सीईओ एसएस किम ने कहा, ‘आगामी संभावनाओं को देखते हुए कंपनी भविष्य को लेकर सतर्कता के साथ आशान्वित है और 2021 में स्पष्टï रूप से कुछ सुधार के संकेत देखे जा सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि महामारी ने इस उद्योग के लिए नई चुनौतियां पैदा की हैं। किम के अनुसार सबसे बडी चुनौती है व्यावसायिक परिचालन को बरकरार रखना और संगठन की वित्तीय सेहत सुनिश्चित करना।
 
बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा का कहना है कि जहां तक घरेलू दोपहिया बाजार का सवाल है, तो इस सेगमेंट के लिए समस्याएं नए साल में भी बनी रह सकती हैं।  शर्मा ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा, ‘भले ही हम उद्योग के तौर पर पिछले साल के स्तरों को देखें, हम अभी भी 2013-14 के स्तरों पर बने रहेंगे। इससे पता चलता है कि गिरावट कितनी गंभीर है। हमें 2018-19 के स्तरों पर वापस आने में कम से कम तीन साल लग सकते हैं।’ इसकी वजह काफी हद तक कोविड और नियामकीय तथा नीतिगत बदलाव हैं।
 
नोमुरा रिसर्च ने एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि हालांकि उद्योग के सभी सेगमेंटों द्वारा वित्त वर्ष 2021-22 में बेहतर प्रदर्शन किए जाने की संभावना है, लेकिन वित्त वर्ष 2019 के स्तरों जैसी वृद्घि पर पहुंचने में एक और साल लग सकता है।  सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरर्स (सायम) के अनुसार,  2018-19 में, यात्री वाहन बिक्री 2.7 प्रतिशत बढ़कर 33,77,436 यूनिट पर पहुंच गई जो 2017-18 में 32,88,581 वाहन थी। एनआरआई कंसल्टिंग ऐंड सॉल्युशंस इंडिया में पार्टनर एवं समूह प्रमुख (व्यवसाय प्रदर्शन में सुधार से संबंधित परामर्श, वाहन इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक) आशिम शर्मा ने कहा, ‘कोविड-19 महामारी के नकारात्मक प्रभावों के बाद, यह अनुमान जताया जा रहा है कि वाहन उद्योग अब 2021-22 में मजबूत वृद्घि दर्ज करेगा।’ उन्होंने कहा कि जहां तक व्यक्तिगत वाहनों का सवाल है तो 2018-19 जैसा स्तर सिर्फ 2023-23 में ही हासिल करना संभव होगा, जबकि दोपहिया के लिए यह उसके एक वर्ष बाद हासिल किया जा सकेगा।
 
शर्मा ने कहा, ‘नए नियमों की पेशकश के साथ अतिरिक्त कीमत वृद्घि संभव है और इससे रिकवरी में और विलंब हो सकता है।’ 2018-19 में, कुल दोपहिया बिक्री 4.86 प्रतिशत बढ़कर 2,11,81,390 वाहन रही, जबकि 2017-18 में यह 2,02,00,117 वाहन थी। भारत में यात्री वाहन बिक्री महामारी की वजह से इस साल अप्रैल-जून की अवधि में 78.43 प्रतिशत घट गई, जो लगातार 9वीं तिमाही में गिरावट थी। लंबे लॉकडाउन के दौरान बंदी के प्रत्येक दिन वाहन उद्योग को कारोबार के संदर्भ में 2,300 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। भले ही यह एक ऐसा वर्ष था जिसे हम भुलाना चाहेंगे, लेकिन कोविड-19 के झटके ने उद्योग को व्यवसाय करने के तौर तरीकों में बदलाव लाने का अवसर दिया है। लॉकडाउन और बाजार बंद के परिवेश ने डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया है। 

First Published : December 28, 2020 | 9:32 PM IST