व्यवसाय प्रक्रिया प्रबंधन (बीपीएम) एवं ओमनीचैनल ग्राहक अनुभव मुहैया कराने वाली कंपनी टेलीपरफॉर्मेंस मध्यम से लेकर वरिष्ठ नेतृत्व जिम्मेदारियों के लिए भारत पर दांव लगा रही है। कंपनी ने अगले दो साल में अपने वैश्विक कर्मियों में भारतीयों का योगदान बढ़ाकर 20 प्रतिशत से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा है।मौजूदा समय में चार प्रमुख पदों पर भारतीय प्रबंधक काबिज हैं, जिनमें कंपनी के अध्यक्ष (ट्रांसफॉर्मेशन) भूपिंदर सिंह, वैश्विक सीआईओ देव मुदालियार, वैश्विक सीडीओ सिद्धार्थ मुखर्जी शामिल हैं।
टेलीपरफॉर्मेंस के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी डेनियल जूलियन ने भारत की अपनी ताजा यात्रा के वक्त कहा था कि वह देश को कंपनी की विकास गतिविधि का केंद्र बनाना चाहेंगे। जूलियन ने कहा, ‘भारत न सिर्फ लागत किफायत की वजह से महत्वपूर्ण है बल्कि प्रतिभा तक पहुंच की वजह से भी लोकप्रिय है। हमारे वैश्विक कर्मियों की संख्या 420,000 है और इनमें से करीब 90,000 भारत में हैं। आगामी वर्ष में इस संख्या में और इजाफा होगा।’
उन्होंने कहा कि अब तक एकमात्र चुनौती बैंडविड्थ समस्या को लेकर रही, लेकिन उम्मीद है कि 5जी पेशकश से यह समस्या भी दूर हो जाएगी।
जूलियन ने कहा, ‘प्रतिभा, वृद्धि, अवसरों के लिहाज से भारत एक शानदार देश है। हमारे लिए एकमात्र बाधा बैंडविड्थ से रही है। जल्द ही भारत में 5जी नेटवर्क उपलब्ध होगा।’
कंपनी ने भारत में अपना परिचालन बढ़ाना पहले ही शुरू कर दिया है और अब वह अपनी डिजिटल एवं एनालिटिक्स पेशकशों को भी मजबूत बनाएगी। टेलीपरफॉर्मेंस ने डिजिटल और एनालिटिक सेगमेंट के लिए कुछ वर्षों में 5000 सदस्यों की मजबूत टीम का लक्ष्य रखा है।
टेलीपरफॉर्मेंस के अध्यक्ष (ग्रुप ट्रांसफॉर्मेशन) भूपिंदर सिंह ने कहा, ‘मौजूदा समय में तकनीकी, विश्लेषण और प्रक्रिया उत्कृष्टता या टीएपी से करीब 1,700 लोगों की टीम जुड़ी हुई है जिसे हम इस साल के अंत तक बढ़ाकर 2,000 करना चाहते हैं। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि हमारे नए व्यवसाय का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा इस टीम द्वारा किए गए कार्य से जुड़ा होगा।’
टेलीपरफॉर्मेंस बीपीएम सेगमेंट में एक विशेष कंपनी है और वॉइस कॉल सेंटर परिचालन में उसकी मजबूत उपस्थिति है। अभी भी उसके राजस्व का 70 प्रतिशत हिस्सा वॉइस-आधारित सेवाओं से आता है।
जिस वजह से टेलीपरफॉर्मेंस अन्य कई बीपीएम कंपनियों से अलग है, वह यह है कि कंपनी भारत पर ज्यादा ध्यान दे रही है। भारत न सिर्फ वैश्विक ग्राहकों को सेवा मुहैया कराने के लिहाज से सबसे बड़े भूभागों में से एक है बल्कि यह देश एक बड़ा बाजार भी है। यह इंटेलनेट के अधिग्रहण की वजह से है, जिसने घरेलू बाजार की प्रमुख कंपनी स्पर्श बीपीओ का अधिग्रहण किया था।