टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की मंगलवार, 18 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) पर संकट बना हुआ है। बैठक में सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के प्रतिनिधित्व को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। ऐसे में अगर बैठक के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हुआ तो AGM को टाला जा सकता है। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, अभी तक टाटा संस ने शेयरधारकों को बैठक की तारीख में किसी बदलाव या इसे टालने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
टाटा संस की AGM मंगलवार को दोपहर 2:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या दूसरे ऑडियो-विजुअल माध्यम से होगी। बैठक में कंपनी के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के निदेशक पद से जुड़े प्रस्ताव समेत कई अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाना है। चंद्रशेखरन ने फरवरी में अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद अगले कार्यकाल के लिए नामांकन नहीं कराने का फैसला किया है।
मामला इसलिए अटका हुआ है क्योंकि सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक नहीं हो पा रही है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने मई में आदेश जारी कर ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक को टालने को कहा था। इसके साथ ही ट्रस्ट के बोर्ड के गठन को लेकर जांच के भी आदेश दिए गए थे।
सर रतन टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के पास 27.98 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 86 के मुताबिक, अगर दोनों ट्रस्ट की कुल हिस्सेदारी 40 फीसदी या उससे ज्यादा है, तो AGM के लिए दोनों ट्रस्टों को मिलकर एक प्रतिनिधि नामित करना होता है।
दोनों ट्रस्टों की कुल हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी है। ऐसे में यह नियम यहां लागू होता है। AGM के लिए जरूरी पांच सदस्यों के कोरम में इस संयुक्त प्रतिनिधि की मौजूदगी भी जरूरी है। लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक नहीं हो पा रही है। इसी वजह से वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर AGM के लिए अपना प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रहा है।
टाटा संस में शापूरजी पलोनजी परिवार की भी करीब 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी है। यही वजह है कि टाटा समूह की मालिकाना और गवर्नेंस व्यवस्था में इन ट्रस्टों की अहम भूमिका है।
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यह पूरा विवाद महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 30A(2) को लेकर है। इस नियम के मुताबिक, किसी ट्रस्ट के बोर्ड में आजीवन या स्थायी ट्रस्टियों की संख्या कुल सदस्यों की 25 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती।
सर रतन टाटा ट्रस्ट में कुल छह ट्रस्टी हैं। इनमें जिमी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा आजीवन ट्रस्टी हैं। यानी छह में से तीन ट्रस्टी आजीवन हैं और उनकी हिस्सेदारी बोर्ड में 50 फीसदी है। इसी वजह से नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे हैं।
मई में चैरिटी कमिश्नर के आदेश के बाद इस मामले की जांच शुरू हुई। इसके बाद सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक नहीं हो पा रही है। हालांकि, ट्रस्ट का कहना है कि कानून में किया गया बदलाव भविष्य में लागू होना चाहिए। उसका तर्क है कि 1 सितंबर 2025 से पहले की गई स्थायी ट्रस्टी नियुक्तियों पर यह नियम लागू नहीं होता। ट्रस्ट ने चैरिटी कमिश्नर के मई के आदेश को एकतरफा यानी एक्स-पार्टी आदेश भी बताया है।
मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, टाटा संस की AGM कराने का सबसे जल्द रास्ता तब निकल सकता है, जब सर रतन टाटा ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी अपनी मौजूदा स्थिति छोड़कर तय अवधि वाले ट्रस्टी के तौर पर फिर से नामांकन करें। इससे धारा 30A(2) के नए नियमों के मुताबिक ट्रस्ट के बोर्ड का गठन करने का रास्ता साफ हो सकता है।
इस बीच, टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इसी सप्ताह सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल 14 अगस्त को खत्म हुआ था और उन्होंने इसे आगे बढ़ाने का फैसला नहीं किया।
टाटा संस की मंगलवार को होने वाली AGM में एन चंद्रशेखरन के निदेशक पद से जुड़े प्रस्ताव पर भी फैसला होना है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के साधारण शेयरों पर डिविडेंड घोषित करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।
चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल के लिए नामांकन नहीं कराने के फैसले के बाद टाटा संस के बोर्ड ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी है। बोर्ड नए चेयरमैन के नाम की सिफारिश के लिए एक पैनल बनाने की प्रक्रिया में भी है।
अगर 18 अगस्त की AGM में जरूरी कोरम पूरा नहीं होता और बैठक स्थगित करनी पड़ती है, तो मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक चंद्रशेखरन तब तक निदेशक बने रहेंगे, जब तक कानूनी तौर पर वैध AGM नहीं हो जाती। टाटा संस ने अभी तक शेयरधारकों को AGM की तारीख में किसी बदलाव या बैठक स्थगित होने की संभावना के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। PTI ने इस मामले पर टाटा संस से ईमेल के जरिए प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
(PTI के इनपुट के साथ)