लागत घटाने के लिए ब्रांडेड गहनों के खुदरा कारोबार की शीर्ष कंपनी तनिष्क ने अब एक नई योजना बनाई है। इसके तहत वह अब अपनी सहयोगी कंपनी टाइटन के साथ मिलकर ब्रांड प्रमोशन करेगी।
इससे वे न केवल मार्केटिंग के खर्चे को कम करेंगी, बल्कि यह उनकी बिक्री में भी इजाफा करेगा। टाइटन और तनिष्क, दोनों टाटा समूह की कंपनियां हैं।
कंपनी के उपाध्यक्ष (रिटेल ऐंड मार्केटिंग) संदीप कुल्हली ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि, ‘हम इस वक्त कुछ खास इलाकों में दोनों ब्रांडों की साथ में टेस्ट मार्केटिंग कर रहे हैं। हमारे रिसर्च के मुताबिक दोनों ब्रांडों के ग्राहक करीब-करीब एक से ही हैं। इसलिए साथ मिलकर मार्केटिंग करने से हमारी सेल्स बढ़ेगी। साथ ही, यह हमें नए मौकों से भी रूबरू करवाएगा।’
तनिष्क के इस वक्त देश भर में 116 स्टोर्स हैं, जबकि टाइटन के स्टोर्स की तादाद 260 के करीब है। टाइटन इस वक्त करीब 80 लाख घड़ियां हर साल बेच रही है, जबकि तनिष्क के स्टोर्स से हर साल 9,000 ग्राहक खरीदारी करते हैं। कुल्हली का कहना है कि, ‘इस तरह की मार्केटिंग से हमें काफी फायदे की उम्मीद है।
दरअसल, अब ज्यूलरी, घड़ियां और धूप के चश्मे जरूरत कम और स्टाइल स्टेटमेंट ज्यादा बन चुके हैं। इसलिए हम तनिष्क के सोने के गहनों और टाइटन के सोने की घड़ियों या हल्के-फुल्के गहनों या रेगुलर घड़ियों या चश्मे जैसे कई उत्पादों की मिलकर मार्केटिंग कर सकते हैं।’
उन्होंने बताया कि, ‘हम अपने रिटेल कारोबार के बारे में भी फिर से रणनीति बना रहे हैं। पहले हम हर साल 10-12 स्टोर्स खोला करते थे, लेकिन अब हमने इस तादाद को 4-5 कर दिया है। हालांकि, अंतर सिर्फ इतना है कि अब हम सिर्फ बड़े स्टोर्स को खोल रहे हैं।
हम अब आठ-दस हजार वर्ग फुट वाली दुकानों को खोल रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा उत्पादों को लोगों के सामने पेश किया जा सके। बड़े स्टोर्स की वजह से हम अपने स्टॉक का भी प्रबंधन अच्छी तरह से कर पाते हैं। इस वक्त हमारे स्टोर्स का साइज दो से लेकर चार हजार वर्ग फुट का है।’
इस वक्त तनिष्क की कुल बिक्री का 75 फीसदी हिस्सा सोने की बिक्री से आता है, जबकि बाकी का हिस्सा हीरों की बिक्री से आता है। कुल्हली ने बताया कि, ‘मंदी की वजह से तो सोने के सिक्कों की बिक्री में 30-40 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। दरअसल, ग्राहक मंदी के इस दौर में सोने को जोखिम से मुक्त निवेश विकल्प मान रहे हैं।
साथ ही, हम अपने वेडिंग कलेक्शन में हल्के गहनों को भी शामिल कर रहे हैं, ताकि इसकी पहुंच आम आदमी तक हो सके। हालांकि, गहने खरीदने में लोगों ने पैसा खर्च करना कम नहीं किया है, लेकिन सोने की चढ़ती कीमतों का मतलब हुआ कि लोगों को अब उसी कीमत में कम सोना मिलेगा।’
कंपनी ने अब शादी के बाजार में भी अपने पांव मजबूती के साथ जमाने का फैसला किया है। कुल्हली के मुताबिक 90,0000 करोड़ से एक लाख करोड़ के भारतीय आभूषण बाजार का 50 फीसदी तो शादी के आभूषणों का ही है। तनिष्क का कारोबार इस वक्त शहरी ज्यूलरी बाजार तक ही सीमित है, जिसे 50 हजार करोड़ का आंका गया है।
कुल्हली का कहना है कि, ‘हम अब कुछ खास समुदायों के लिए वेडिंग कलेक्शन को लॉन्च कर रहे हैं। दक्षिण भारत में तो हमने ऐसा करना शुरू भी कर दिया है। अब हमारी निगाह उत्तर भारत की ओर है।’ कंपनी अब मॉडर्न डिजाइनों को भी लॉन्च करने की योजना बना रही है, ताकि युवाओं को लुभाया जा सके।
नई कोशिश
दोनों कंपनियों को है उम्मीद कि इससे दोनों को होगा फायदा
इस वक्त टाइटन के इस वक्त 260 स्टोर हैं, जबकि तनिष्क के हैं 116 स्टोर