सुभिक्षा पर छाए संकट के बादल छंटते नजर नहीं आ रहे। अब एफएमसीजी कंपनी हिन्दुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) बकाया राशि के भुगतान नहीं करने के मामले में सुभिक्षा को न्यायालय में घसीट रही है।
एचयूएल के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने बकाया राशि के भुगतान न कर पाने के लिए सुभिक्षा के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है।’ हालांकि वे इस मामले की प्रकृति और बकाया राशि के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
एफएमसीजी कंपनियों की कुल बिक्री का 5 से 6 फीसदी हिस्सा मॉडर्न ट्रेड रिटेल का है। हाल में यह खबर आई थी कि गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और डाबर जैसी कंपनियों ने इन रिटेलरों को माल की आपूर्ति बंद कर दी या नकदी पर उपलब्ध कराने लगी।
एफएमसीजी क्षेत्र के विशेषज्ञ आनंद शाह ने कहा, ‘नवंबर 2008 से एफएमसीजी कंपनियों ने इन रिटेल स्टोरों को माल की आपूर्ति बंद कर दी है। यह उस समय की बात है, जब वैश्विक मंदी अपने चरम पर थी। अभी भी ये कंपनियां डिमांड ड्राफ्ट पर ही माल की आपूर्ति करा रही है।’
मिसाल के तौर पर वैश्विक आर्थिक संकट और तरलता संकट की वजह से सुभिक्षा और विशाल ट्रेडर्स जैसी रिटेल कंपनियां अपनी ज्यादातर रकम विस्तार योजनाओं और पूंजीगत कारोबार में लगाने लगी और इसी वजह से वे एफएमसीजी कंपनियों से खरीदे हुए माल का भुगतान नहीं कर पाई।
चिक शैम्पू और फेयरएवर फेयरनेस क्रीम जैसे उत्पाद बनाने वाली कंपनी केविन केयर के कार्यकारी अधिकारी रमेश विश्वनाथन ने कहा, ‘कुछ रिटेलरों ने भुगतान में देरी की है।’
हालांकि केविनकेयर अभी तक किसी तरह की कानूनी कार्रवाई करने पर विचार नहीं कर रही है। विश्वनाथन कहते हैं, ‘अगर कुछ कमियों को छोड़ दें, तो मॉडर्न रिटेल कारोबार अच्छे तरीके से विकास कर रहा है। अभी समय खराब जरूर है, पर सब ठीक हो जाएगा।’