बंबई उच्च न्यायालय के एक खंडपीठ ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) पर पालघर पुलिस द्वारा की जा रही हर तरह की जांच पर मंगलवार को रोक लगा दी। यह एफआईआर कथित तौर पर रकम की हेराफेरी और खाते में अनियमितता को लेकर है। अदालत ने अपने आदेश में शिकायतकर्ता आशुतोष कांबले (कंपनी के शेयरधारक) की नेकनीयती पर गंभीर रूप से संदेह जताया। इंडियाबुल्स हाउसिंग ने अदालत का रुख किया था और अदालत ने इस पर जल्द सुनवाई की। अदालत ने इस बात को रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि जांच के चरण में हस्तक्षेप को अपवाद मामलों में ही सही ठहराया जा सकता है।
शिकायतकर्ता के इरादे पर अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह शिकायत गलत इरादे से की हुई लगती है। अदालत ने कहा कि चूंकि हमने जांच पर रोक लगाई है, लिहाजा एफआईआर के आधार पर आगे की कार्रवाई का सवाल नहीं उठता।
पालघर न्यायिक दंडाधिकारी की तरफ से सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत आदेश जारी किए जाने के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी। कंपनी के वकील ने अदालत से कहा कि यह एफआईआर कुछ और नहीं है बल्कि लंबे समय से चल रही ब्लैकमेलिंग का हिस्सा है। चूंकि दिल्ली में रैकेट चलाने वाला ब्लैकमेलर गिरफ्तार किया जा चुका है, लिहाजा उसने महाराष्ट्र में इस तरह का कदम उठाने की कोशिश की है और यह शिकायत पिछली शिकायत जैसी ही है, जो गलत है। वकील ने कहा कि कांबले ने कुछ महीने पहले कंपनी से संपर्क किया था और रकम ऐंठने की कोशिश की थी, लेकिन इंडियाबुल्स इस धमकी के आगे नहीं झुकी। कंपनी ने पिछले तीन साल से ब्लैकमेलर की कोशिश को भी ऐसे ही नाकाम किया है और उसे उचित कानूनी कार्यवाही के जरिये आगे बढ़ाना पसंद किया। इस गिरोह के सदस्यों को हिरासत में लिया जा चुका है और उनकी जमानत याचिका अदालत बार-बार खारिज कर रही है।
वकील ने कहा कि इस मामले में कांबले ने पालघर पुलिस के न्यायाधिकार क्षेत्र में मामला दर्ज करने की खातिर अपने घर का गलत पता दिया जहां कंपनी का कोई कार्यालय या कारोबार नहीं है। एफआईआर दर्ज कराने से महज 10 दिन पहले उसने कंपनी के 500 शेयर खरीदे ताकि वंचित शेयरधारक के तौर पर खुद को पेश कर सके।
अपने आदेश में अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया लगता है कि कांबले को इस मामले में आपराथिक कार्यवाही शुरू करने के काम में लगाया गया था। अदालत को बताया गया कि कंपनी मामलों के मंत्रालय ने इंडियाबुल्स के खातों की जांच की है और इस आरोप में जिस कर्ज का जिक्र है, उसकी भी जांच की है। साथ ही इस बाबत अदालत में शपथपत्र भी दिया है।