ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) पर रोक की समय सीमा खत्म होने से पहले सरकार मझोले एवं छोटे उद्यमों के लिए विशेष ऋण शोधन ढांचा तैयार कर रही है। मझोले एवं छोटे उद्योग अब भी कोविड-19 महामारी की चोट से जूझ रहे हैं और उन्हें उबारने के लिए सरकार को विशेष इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
इस विशेष राहत उपाय के तहत सरकार दिवालिया संहिता में कुछ विशेष प्रावधान करने जा रही है। ये प्रावधान सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के राहत ढांचे का हिस्सा हो सकते हैं। फिलहाल जिन उपायों पर विचार हो रहा है उनमें प्रवर्तक और कर्जदाता ऋण समाधान के लिए न्यायालय से बाहर आपसी सुलह से मामला निपटा सकते हैं। इस समय ऐसा कोई कानूनी ढांचा नहीं है और विशेष मकसद से कुछ खास मामलों में ही प्रवर्तक और कर्जदाता आपसी सहमति से समाधान कर पा रहे थे। अगर सब कुछ योजनानुसार रहा तो कंपनी और ऋणदाता संपत्तियों की सार्वजनिक नीलामी के बिना ही समाधान पा सकते हैं।
दूसरी अहम बात यह होगी कि ऋण शोधन के लिए आवेदन करने के बाद भी कंपनी के मौजूदा प्रबंधन से उसके अधिकार नहीं छीने जाएंगे और एक समाधान पेशेवर की नियुक्ति कर सभी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। मौजूदा प्रावधानों के तहत दिवालिया आवेदन किए जाने पर समाधान पेशेवर संबंधित कंपनी के निदेशक मंडल के अधिकार अपने हाथों में ले लेते हैं।
इसके अलावा सरकार इन कंपनियों के लिए भुगतान में चूक की अधिकतम सीमा संशोधित करने पर भी विचार कर रही है। महामारी के दौरान सरकार ने आईबीसी के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी थी। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘हम फिलहाल कुछप्रावधानों पर काम कर रहे हैं, जो आईबीसी की धारा 240ए के तहत प्रभावी बनाए जा सकते हैं। इससे कंपनियों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी। हम ऐसे कुछ प्रावधानों पर संबंधित मंत्रालय, विभाग, संबंधित पक्षों जैसे बैंक आदि के साथ चर्चा कर रहे हैं।’
विभिन्न क्षेत्रों की परेशानियों को देखते हुए सरकार ने पिछले वर्ष दिसंबर में आईबीसी मार्च तक के लिए स्थगित कर दी थी। समझा जा रहा है कि सरकार अब आईबीसी निलंबित नहीं रखेगी क्योंकि यथास्थिति जारी रखने के लिए उसे आईबीसी अधिनियम में संशोधन करने होंगे। इन संशोधनों के लिए संसद की मंजूरी अनिवार्य होगी। सूत्रों ने कहा कि राहत उपायों के अलावा एक वैकल्पिक समाधान प्रणाली भी लेकर आएगी, जिनकी जद में ज्यादातर कंपनियां आ जाएंगी। इसमें विशेष प्रावधान के साथ एमएसएमई का विशेष जिक्र किया जाएगा।