सितंबर में दवा बिक्री में फिर से 4.5 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई है, क्योंकि नए दवा पर्चों यानी प्रिस्क्रिप्शन में इजाफा हुआ है। छोटी दवा कंपनियों ने मौजूदा ब्रांडों, संगठित कर्मियों और नए ब्रांडों की पेशकश की मदद से घरेलू बाजार में शानदार वृद्घि दर्ज की है।
सिप्ला और ग्लेनमार्क को छोड़कर कई बड़ी कंपनियों ने धीमी वृद्घि दर्ज की। सिप्ला और ग्लेनमार्क ने अपनी कोविड-19 उपचार की दवाओं फैविपिराविर और टोसिलीजुमैब की बिक्री के जरिये सितंबर में दो अंक की वृद्घि दर्ज की। कोरोना रेमेडीज, जुवेंटस हेल्थकेयर और मेडली जैसी छोटी कंपनियों ने तेज गति से वृद्घि दर्ज की है। चिकित्सा-वार बिक्री के एक आंकड़े के विश्लेषण से खुलासा हुआ है कि डर्मेटोलॉजी, विटामिन, कार्डियक, और मधुमेह-रोधी खंडों में वृद्घि के मुख्य वाहक हैं। उदाहरण के लिए, एमक्योर समूह की कंपनी जुवेंटस ने सितंबर और जुलाई-सितंबर तिमाही में डर्मेटोलॉजी और विटामिन सेगमेंट में अच्छी वृद्घि दर्ज की।
जुवेंटस के पास जिंक सप्लीमेंट जिंकोनिया जैसे प्रमुख ब्रांड हैं जिनमें महामारी के दौरान अच्छी तेजी दर्ज की गई। दरअसल, कंपनी को आपूर्ति किल्लत के बाद पिछली तिमाही में दवाओं के उत्पादन एवं वितरण में तेजी लानी पड़ी थी। बिक्री 6 या सात गुना तक बढ़ी है। एआईओसीडी अवाक्स डेटा के अनुसार, जुवेंटस ने सितंबर में विटामिन बिक्री में 90 प्रतिशत और सालाना आधार पर 372 प्रतिशत की तेजी दर्ज की।
दूसरी तरफ, अहमदाबाद स्थित कोरोना रेमेडीज ने यह सुनिश्चित किया है कि उसकी बिक्री टीम उत्साहित बनी हुई है। बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत करते हुए कोरोना रेमेडीज के प्रवर्तक एवं कार्यकारी निदेशक नीरव मेहता ने कहा, ‘हमने अपनी बिक्री टीम के लिए बकाया इसेंटिव में विलंब नहीं किया है और सुनिश्चत किया कि वे अच्छी धारणा के साथ बने रहें। जब लॉकडाउन हटाया गया था, तो अपने ब्रांडों को प्रोत्साहित करने के तरीकों में अंतर आया था।’ कोरोना रेमेडीज ने सितंबर में यूरोलॉजी और कार्डियक बिक्री के संदर्भ में अच्छा प्रदर्शन किया। कुछ कंपनियों ने स्टोमेटोलॉजिकल – डेंटल या ओरल मेडिसिंस- जैसे सेगमेंटों में अच्छा प्रदर्शन किया है। बीटाडिन के विन मेडिकेयर ने सितंबर तिमाही के दौरान 96.5 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की।
हालांकि विश्लेषक इन कंपनियों पर गहनता से नजर नहीं रखते हैं, लेकिन बड़ी फार्मा कंपनियों पर नजर रखने वाले मुंबई स्थित एक विश्लेषक ने कहा कि इनमें से कुछ कंपनियों ने उस स्थिति में शानदार क्षमता का प्रदर्शन किया है जब महामारी के दौरान उपलब्ध अवसरों पर ध्यान देने की जरूरत थी।
महामारी के बीच बड़ी फर्में तेजी से होंगी मजबूत
मजबूत बैलेंस शीट वाली बड़ी कंपनियां महामारी के बाद वित्त वर्ष 2022 में बाजार भागीदारी में इजाफा दर्ज कर सकती हैं। इसके विपरीत, ज्यादा ऋण जोखिम वाली और कमजोर कंपनियों पर अपने व्यवसायों के पुनर्गठन या उनसे निकलने का दबाव बढ़ सकता है।
बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड द्वारा जारी शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के बीच, मुनाफे पर दबाव के बावजूद मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां अपने संबद्घ क्षेत्रों में समेेकन की वजह से बाजार भागीदारी बढ़ाने में सफल हो रही हैं। इसके अलावा, चीन से आयात को लेकर पैदा हुई चिंता से असंगठित क्षेत्र की कई कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।
बीएनपी पारिबाएमएफ के वरिष्ठ फंड प्रबंधक कार्तिकराज लक्ष्मणन ने कहा, ‘ऐसे समय में, जब वृद्घि चुनौतीपूर्ण है, हमें विश्वास है कि इस तरह के धु्रवीकरण और भिन्नताएं तब तक बनी रह सकती हैं जब तक कि आय में अच्छा सुधार नहीं दिखता। इस परिवेश में हमें भरोसा है कि लार्ज-कैप कंपनियां श्रेष्ठ प्रदर्शन और अच्छी बाजार भागीदारी में सफल रहेंगी।’ परिसंपत्ति प्रबंधक ऐसी मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर दांव लगा रही है जिनके द्वारा पेश उत्पाद ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैंं। वहीं मौजूदा हालात में अधिक ऋण जोखिम वाली कंपनियों से परहेज करना बेहतर है। बीएस