विश्लेषकों द्वारा खुलासा मानकों को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का शेयर करीब 6 प्रतिशत टूट गया, जो 2 नवंबर के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट है। देश की बेहद मूल्यवान कंपनी ने शुक्रवार को दिसंबर तिमाही के लिए अपने तिमाही मुनाफे को दर्ज किया, हालांकि उसने सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) का खुलासा नहीं किया है, जो उसके तेल एवं पेट्रोरसायन खंड के विश्लेषण का मुख्य मानक है। इस खंड का कंपनी के कुल राजस्व में करीब 70 प्रतिशत योगदान रहा है।
एडलवाइस के विश्लेषकों द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पारदर्शिता स्तर सभी व्यवसायों में घट रहा है। आरआईएल ने प्रमुख मानक जीआरएम को एक साथ दर्ज करना बंद किया है। इसी तरह, उसने रिटेल और के लिए खंड-वार कारोबार विश्लेषण की जानकारी नहीं दी है।’
विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए आरआईएल का शुद्घ लाभ सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की वृद्घि के साथ 13,100 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। तेल-रसायन (ओ2सी) और रिटेल वर्टिकलों का प्रदर्शन उम्मीद पर खरा नहीं उतरा, जबकि दूरसंचार क्षेत्र ने अनुमानों को पीछे छोड़ दिया।
सिटीग्रुप के विश्लेषक सौरभ हांडा ने ग्राहकों को भेजी एक रिपोर्ट में कहा है, ‘कंपनी ने रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन के प्रदर्शन की अलग अलग जानकारी देना बंद कर दिया है। इसका कारण पता करना कठिन है, लेकिन हमारा मानना है कि इसकी वजह काफी हद तक रिफाइनिंग में लगातार कमजोरी आना है।’
एडलवाइस की रिपोर्ट में कहा गया है कि आरआईएल का मुनाफा अनुमानों को मात देने में सफल रहा है।
आरआईएल का शेयर 114.5 रुपये या 5.6 प्रतिशत गिरकर 1,935 रुपये पर बंद हुआ। 16 दिसंबर के 2,324 रुपये के ऊंचे स्तर से यह शेयर करीब 17 प्रतिशत गिर चुका है और कंपनी की बाजार वैल्यू 2.6 लाख करोड़ रुपये घटी है। इस गिरावट ने ‘भारत की सबसे ज्यादा मूल्यवान कंपनी’ की पहचान को खतरा पहुंचाया है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में कंपनी का प्रदर्शन कमजोर बना रह सकता है। मैक्वेरी के आदित्य सुरेश और अभिनील दहीवाले ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में आरआईएल की आय अनुमानों के मुकाबले 25 प्रतिशत नीचे रहेगी। उन्होंने इस शेयर के लिए 1,350 रुपये का कीमत लक्ष्य दिया है।
उन्होंने लिखा है, ‘हमने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2021 की मुख्य ईपीएस 10 प्रतिशत घटकर 60 रुपये पर रहेगी, जिसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में यह सुधरकर 70-80 रुपये (95-111 रुपये के अनुमान के मुकाबले) पर पहुंचेगी।’
आरआईएल ने अपने ऊर्जा व्यवसाय पर निर्भरता घटाने के लिए कई कदम उठाए हैं और वह दूरसंचार एवं रिटेल टाइटन बनने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी ने पिछले साल इसी लक्ष्य के तहत वैश्विक निवेशकों से 27 अरब डॉलर की रकम जुटाई थी।
बाजार पूंजीकरण में टीसीएस से पिछड़ी
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) सोमवार को आरआईएल को पीछे छोड़ते हुए बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। दोपहर के कारोबार के दौरान टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 12,45,341.44 करोड़ रुपये था, जबकि आरआईए) का बाजार पूंजीकरण घटकर 12,42,593.78 करोड़ रुपये रह गया। जहां तिमाही नतीजों से आरआईएल के निवेशक उत्साहित नहीं हुए वहीं टीसीएस का शेयर 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ एक साल के उच्चतम स्तर 3,345.25 रुपये पर आ गया। टीसीएस ने पिछले साल मार्च में सबसे मूल्यवान कंपनी का दर्जा खो दिया था, जिसे उसने सोमवार को दोबारा हासिल कर लिया।