हैदराबाद की टीका बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक कोवैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में लगी है मगर सूत्रों ने बताया कि उसे टीके में इस्तेमाल होने वाले एडजुवेंट की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। एडजुवेंट का इस्तेमाल आम तौर पर टीके में प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, ‘कोवैक्सीन के उत्पादन में तेजी नहीं आने की एक वजह यह भी है कि कंपनी को अमेरिका से एडजुवेंट की आपूर्ति में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।’ भारत बायोटेक जुलाई से हर महीने कोवैक्सीन की 1.2 खुराक तैयार करना चाहती है। अभी हर महीने 50 लाख खुराक का उत्पादन किया जा रहा है। भारत बायोटेक अपने टीके में प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए कंसास की वायरोवैक्स के एडजुवेंट का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि इस बारे में जानकारी के लिए संपर्क करने पर कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया।
एडजुवेंट फार्माकॉलॉजी या इम्युनोलॉजी एजेंट होते हैं, जो टीके की प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाते हैं। ज्यादा एंटीबॉडी बनाने और लंबे समय तक प्रतिरक्षा बनाए रखने के लिए भी इसे टीके में मिलाया जा सकता है।
वायरोवैक्स का यरो वैक्स का अलहाइड्रॉक्सिक्विम-2 एडजुवेंट का कोवैक्सीन में उपयोग किया गया है, जो सार्स-कोव-2 के निष्क्रिय वायरस से बना टीका है। सूत्रों ने कहा, ‘टीके में इस्तेमाल होने वाले अन्य कच्चे माल जैसे फिल्टर और बैग की कमी दूसरे आपूर्तिकर्ता से पूरी की जा सकती है। मगर एडजुवेंट जैसे महत्त्वपूर्ण रसायन के मामले में ऐसा संभव नहीं है। वॉलंटियरों पर जिस टीके का परीक्षण किया गया है और जिसे मंजूरी मिली है, उसे इस एडजुवेंट के साथ ही बनाया गया है। इसमें किसी तरह का बदलाव करने से नए सिरे से क्लीनिकल परीक्षण करना होगा और दोबारा मंजूरी लेनी पड़ सकती है।’
भारत बायोटेक के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक कृष्णा एल्ला ने पहले बताया था कि सॉर्स टीका विकसित करने में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले एडजुवेंट एल्युमीनियम हाइड्रॉक्साइड से सांस की दिक्कत का खतरा हो सकता है, इसीलिए उनकी कंपनी ने अलग तरह के एडजुवेंट का उपयोग किया है, जो एंटी-बॉडी पर निर्भरता बढऩे का जोखिम कम करता है।
कुछ दिन पहले सीरम इंडस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी अदार पूनावाला ने संकेत दिया था कि कच्चे माल की कमी के कारण नोवावैक्स टीके के उत्पादन में वृद्घि नहीं हो पा रही है। पूनावाला ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा था, ‘अमेरिका ने रक्षा कानून लगा दिया है और कच्चे माल के निर्यात पर रोक लगा दी है। सभी टीका निर्माताओं को इसकी वजह से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।’ सीरम ने नोवावैक्स का उत्पादन पहले ही रोक दिया है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका से कच्चे माल की आपूर्ति हो जाती तो नोवावैक्स का 50 फीसदी अधिक उत्पादन हो जाता। मगर अमेरिकी प्रतिबंध नहीं होने पर हम जितना भंडारण करते, इस महीने से उसके आधे नोवावैक्स का ही भंडारण हो पाएगा।’