एफएमसीजी क्षेत्र के लिए राह चुनौतीपूर्ण दिख रही है, भले ही मार्च तिमाही का वित्तीय परिणाम उम्मीदों के अनुरूप रहा है, क्योंकि जनवरी और फरवरी 2021 में अच्छी खपत की वजह से इस क्षेत्र की कंपनियों को मदद मिली।
आर्थिक स्थिति और धारणा में बड़ा बदलाव आया है। दूसरी लहर से वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही पर प्रभाव पड़ेगा। इसका आपूर्ति शृंखलाओं पर दीर्घावधि नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि कफ्र्यू, लॉकडाउन आदि की वजह से समस्याएं पैदा हुई हैं, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हेल्थकेयर पर कितना दबाव पड़ा है।
पहली लहर के विपरीत, ग्रामीण संक्रमण दर 2021 में काफी ऊंची बनी हुई है। इसका खपत पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। कृषि से मजबूत प्रदर्शन की वजह से पिछले वित्त वर्ष में ग्रामीण खपत बरकरार थी। हरेक एफएमसीजी कंपनी को बढ़ती लागत का दबाव झेलना पड़ा है। इस महंगाई का असर थोक बिक्री कीमत सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और उपभोक्ता कीमत सूचकांक (सीपीआई), दोनों में स्पष्ट रूप से दिखा है।
हिंदुस्तान यूनिलीवर का शुद्घ लाभ चौथी तिमाही में 41 प्रतिशत बढ़कर 2,143 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह बाजार अनुमान से ज्यादा रहा। शुद्घ बिक्री सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 11,950 करोड़ रुपये रही। 24.4 प्रतिशत के ओपीएम (परिचालन मुनाफा मार्जिन) के साथ एबिटा में 43 प्रतिशत तक का इजाफा दर्ज किया गया, जो अनुमानों के मुकाबले थोड़ा ऊपर था। लेकिन मार्च 2020 के अंत में कफ्र्यू/लॉकडाउन लागू होने के बाद से आंकड़े अनिश्चित बने हुए हैं और इनमें कमी आई है। इसलिए, सालाना आधार पर गणना के लिए आधार स्पष्ट नहीं है।
हालांकि तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2020) और 2018-19 की चौथी तिमाही पर भी विचार करें तो पता चलता है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर का वित्तीय परिणाम मजबूत बना हुआ है। 2018-19 की चौथी तिमाही के मुकाबले राजस्व 19 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 2.2 प्रतिशत बढ़ा। मुनाफा मार्जिन भी मार्च 2018-19 में दर्ज स्तरों के समान हो चुका है।
ब्रिटानिया और नेस्ले इंडिया जैसी अन्य एफएमसीजी कंपनियों ने कम मजबूत परिणाम दर्ज किया, लेकिन ब्रिटानिया के लिए मुनाफे में मामूली कमी और नेस्ले के लिए मामूली वृद्घि के मुकाबले दोनों ने सालाना आधार पर 8-9 प्रतिशत की राजस्व वृद्घि दर्ज की है।
निवेशक एफएमसीजी को बेहद पूर्वानुमानित उद्योग के रूप में देखते हैं। लोग पर्सनल केयर उत्पादों का इस्तेमाल, या स्नैक और शीतल पेय का उपयोग बंद करना नहीं चाहते। इसके अलावा भारतीय कंपनियां सक्षम आपूर्ति और वितरण शृंखलाओं के लिहाज से भी मजबूत हैं।