पूर्ववर्ती वर्ष के ज्यादातर समय तक कमजोर प्रदर्शन के बाद हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, और नेस्ले जैसी एफएमसीजी कंपनियां अब अपने बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। निफ्टी एफएमसीजी सूचकांक पिछले महीने के दौरान करीब 3 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी-50 सूचकांक में इस अवधि में महज 0.6 प्रतिशत की तेजी आई।
निफ्टी एफएमसीजी सूचकांक शुक्रवार को 0.05 प्रतिशत लुढ़का, जबकि निफ्टी-50 सूचकांक में 0.27 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
विश्लेषक इस अच्छे प्रदर्शन के लिए आगामी तिमाहियों में एफएमसीजी कंपनियों द्वारा बेहतर प्रदर्शन किए जाने की संभावना को जिम्मेदार मान रहे हैं। जेएम फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज में प्रबंध निदेशक एवं मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘हम एफएमसीजी शेयरों पर सकारात्मक हैं। प्रमुख सूचकांक और इस क्षेत्र में आय सुधार के कमजोर समावेश की वजह से इस क्षेत्र का प्रदर्शन आगामी महीनों में अच्छा रहने की संभावना है।’ इसके परिणामस्वरूप, उनकी कंपनी ने इस क्षेत्र प अपना नजरिया अंडरवेट से बदलकर इक्वल वेट कर दिया है। हालांकि यह क्षेत्र दीर्घावधि परिदृश्य से कमजोर बना हुआ है। निफ्टी एफएमसीजी सूचकांक पिछले साल मार्च के बाद से 33 प्रतिशत चढ़ा है जबकि बेंचमार्क सूचकांक में 83 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। पांच साल की अवधि के दौरान भी यह 63 प्रतिशत चढ़ा जबकि बेंचमार्क सेंसेक्स के लिए यह तेजी 82 प्रतिशत रही।
कुछ एफएमसीजी शेयरों के ताजा मजबूत प्रदर्शन के बावजूद कई विश्लेषकों को यह दीर्घावधि रुझान ज्यादा बदलने के आसार नहीं हैं।
नारनोलिया सिक्योरिटीज के मुख्य निवेश अधिकारी शैलेंद्र कुमार का कहना है, ‘उपभोक्ता वस्तु कंपनियों को कमजोर बिक्री वृद्घि और राजस्व में एक अंक की वृद्घि के साथ ढांचागत वृद्घि को लेकर समस्याओं का सामना करना पड़ा है। महामारी के बाद की अवधि में, उपभोक्ताओं ने कारोबार में कमी की है जिससे कंपनियों का मुनाफा मार्जिन प्रभावित हो रहा है।’
ऊंची जिंस और ऊर्जा कीमतों तथा कमजोर राजस्व वृद्घि की वजह सेवह वित्त वर्ष 2022 में इस क्षेत्र में ज्यादा एबिटा वृद्घि की संभावना नहीं देख रहे हैं। उनका कहना है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि शेयर बाजारों पर एफएमसीजी शेयर कमजोर बने रहेंगे। उनके अनुसार, एफएमसीजी शेयरों द्वारा ताजा मजबूत प्रदर्शन इन कंपनियों में रक्षात्मक प्रवृत्ति की वजह से दिखा था, न कि उनके श्रेष्ठ वित्तीय प्रदर्शन की वजह से। उनके अनुसार, ‘एफएमसीजी और आईटी शेयर ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें निवेशक बाजार में रिकॉर्ड ऊंचे मूल्यांकन और फिर संभावित गिरावट की स्थिति में ध्यान देते हैं।’
दीर्घावधि के दौरान, एफएमसीजी कंपनियों को वृद्घि संबंधित समस्याओं का लगातार सामना करना पड़ेगा। पिछली करीब 24 तिमाहियों में, उद्योग की शुद्घ बिक्री सिर्फ तीन बार (वित्त वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही, वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही, और वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही) दो अंक में दर्ज की गई थी। शीर्ष-10 एफएमसीजी कंपनियों की राजस्व वृद्घि वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में सुधरी थी, लेकिन पिछले वित्त वर्ष शुद्घ बिक्री वृद्घि 5.1 प्रतिशत पर बनी रही।
कई विश्लेषकों को पूरे देश में लॉकडाउन की वजह से वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में कंपनियां का प्रदर्शन कमजोर रहने की आशंका है, क्योंकि देश को कोविड-19 की दूसरी लहर का सामना करना पड़ा है।
एफएमसीजी कंपनियों के लिए बड़ी चिंता जिंस कीमतें बढऩे की वजह से परिचालन मार्जिन में आई गिरावट है। वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में उद्योग का एबिटा मार्जिन करीब 170 आधार अंक घटा, क्योंकि ऊंची जिंस कीमतों से उन पर दबाव पड़ा। यदि वित्त वर्ष 2022 में बिक्री वृद्घि की रफ्तार धीमी बनी रही तो उद्योग मार्जिन पर दबाव और बढ़ सकता है।