विमानन उद्योग का कहना है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में लड़ाई शुरू होने के बाद से भारत में विमानन ईंधन (एटीएफ) की कीमतें कच्चे तेल की कीमतों के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। उद्योग के अधिकारियों ने ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ को बताया कि भारतीय रिफाइनरियों का जेट फ्यूल पर मार्जिन काफी बढ़ गया है, जबकि कच्चे तेल को एटीएफ में बदलने की उनकी लागत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
चूंकि भारत में एटीएफ आमतौर पर किसी एयरलाइन के परिचालन खर्चों का करीब 40 प्रतिशत होता है। इसलिए जेट ईंधन की कीमतों में हुई भारी वृद्धि ने हवाई किरायों को बढ़ा दिया है और कुछ एयरलाइनों को अब यात्रियों से ‘फ्यूल सरचार्ज’ लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
विमानन ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच एयरलाइन अधिकारियों का कहना है कि भारत को घरेलू एटीएफ की कीमतों को ‘मीन ऑफ प्लैट्स अरब गल्फ’ (मोपैग) बेंचमार्क से अलग कर देना चाहिए और इसके बजाय घरेलू ‘कच्चे तेल की कीमत + निश्चित रिफाइनिंग मार्जिन’ मॉडल अपनाना चाहिए।
भारतीय विमानन कंपनियां मोपैग के आधार पर एटीएफ की कीमतों का भुगतान करती हैं। यह एक ऐसा बेंचमार्क है जिसे एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्स रोजाना तय करती है। यह बेंचमार्क जुबैल, रास तनुरा, रुवैस, मीना अल-अहमदी और सिट्रा जैसी खाड़ी की प्रमुख रिफाइनरियों में स्पॉट जेट फ्यूल कार्गो की औसत कीमतों पर आधारित होता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद से ये रिफाइनरियां, जो निर्यात का प्रमुख केंद्र हैं, या तो बंद हो गई हैं या उन्होंने अपना उत्पादन कम कर दिया है।
इस बीच, भारत में एयरलाइनें घरेलू रिफाइनरियों से तेल खरीद रही हैं, जिनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) मुख्य रूप से शामिल हैं और ये भारत के भीतर ही कच्चे तेल को रिफाइन करती हैं। एयरलाइन के अधिकारियों ने बताया कि भारतीय रिफाइनरों के लिए कच्चे तेल को एटीएफ में बदलने की लागत में बड़ा बदलाव नहीं आया है।
उद्योग के अधिकारियों की ओर से बताए गए आंकड़ों से पता चलता है कि हाल तक कच्चे तेल और विमानन ईंधन की कीमतें मोटे तौर पर एक जैसी चल रही थीं। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से फरवरी के बीच ब्रेंट क्रूड और उसके प्लैट्स प्रीमियम का औसत लगभग 69.5 डॉलर प्रति बैरल था। इसी दौरान, मोपैग पर आधारित एटीएफ बेंचमार्क का औसत 84.5 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि रिफाइनरी मार्जिन लगभग 15 डॉलर प्रति बैरल रहा।
यह अंतर अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के कुछ ही दिनों बाद मार्च की शुरुआत में सामने आया।