संदीप गोयल की मोगा मीडिया ने देश की एक सबसे पुरानी विज्ञापन एजेंसी रीडिफ्यूजन का अधिग्रहण किया है। रीडिफ्यूजन के पार्टनर अरुण नंदा और अजित बालकृष्णन ने एजेंसी के दैनिक कामकाज की जिम्मेदारी छोडऩे का निर्णय लिया है। इन दोनों साझेदारों में से प्रत्येक की रीडिफ्यूजन में 50 फीसदी हिस्सेदारी थी। नंदा ने बालकृष्णन और मोहम्मद खान के साथ मिलकर 1973 में रीडिफ्यूजन की स्थापना की थी। वह रीडिफ्यूजन के चेयरमैन पद पर बरकरार रहेंगे। जबकि गोयल प्रबंध निदेशक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। खबर लिखे जाने तक सौदे के आकार के बारे में खुलासा नहीं किया गया था। सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि रीडिफ्यूजन एक स्वतंत्र ब्रांड के तौर पर परिचालन नहीं करेगी। इसका विलय मोगा मीडिया में कर दिया जाएगा।
संपर्क करने पर गोयल इस मुद्दे पर टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध नहीं थे। वह 1997 से 2001 के बीच रीडिफ्यूजन के अध्यक्ष थे। इस अधिग्रहण के बारे में औपचारिक घोषणा संभवत: सोमवार को की जाएगी। नंदा और बालकृष्णन द्वारा इस एजेंसी में डब्ल्यूपीपी एजेंसी वाईऐंड आर की 24.67 फीसदी और देंत्सु की 13.33 फीसदी यानी कुल 40 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण के करीब तीन साल बाद रीडिफ्यूजन का सफर समाप्त हो रहा है।