लाख रुपये में कार का सपना अब सच हो गया है। टाटा मोटर्स ने नैनो लॉन्च कर लाखों लोगों की ‘एक कार’ की ख्वाहिश को सच के करीब पहुंचा दिया है।
इसमें कोई शक नहीं कि इस मिशन के अगुआ रतन टाटा रहे हैं, लेकिन निश्चित लागत में कल-पुर्जे तैयार करने वाली एजेंसियों के सराहनीय योगदान के बगैर ऐसा हो पाना असंभव था।
कल-पुर्जा कारोबार के बेहतरीन और बड़े खिलाड़ियों ने नैनो के कल-पुर्जे तय लागत में तैयार करने के लिए अथक कोशिश की है। टाटा जॉनसन को ही ले लीजिए, जिसने नैनो की सीट तैयार की है। टाटा मोटर्स ने उसे बताया कि कार की सीटें हल्की हो, जो शरीर को राहत दे। साथ ही, यह सुरक्षा के सभी मानकों पर खरा उतरे।
जॉनसन ने जो सीटें बनाई वे अलग-अलग होने की बजाय सिंगल ब्रेस स्ट्रक्चर आधारित है। इसमें सही मात्रा में फोम डाली गई है ताकि लोगों को सहूलियत में कोई कमी नहीं हो। चूंकि इसे पुनर्व्यवस्थित करने की सुविधा सीट में नहीं दी गई है, जिसके चलते कुछ खर्च घटाने में मदद मिली।
टाटा की सहयोगी कंपनी टाटा टैको ने इंटीरियर इंजेक्शन मोल्डिंग्स, डैशबोर्ड और डोर हैंडल जैसे पुर्जे बनाए हैं। कंपनी ने कार के केबल और दर्पण बनाने के लिए स्पेन की फियोस्का इंटरनेशनल के साथ पुणे में संयुक्त उद्यम भी लगाया है। नैनो के कुल मिलाकर 20 फीसदी से अधिक पुर्जों की आपूर्ति टाटा टैको ही कर रही है।
दोपहिया वाहन निर्माता काइनेटिक इंजीनियरिंग ने भी नैनो के कुछ पुर्जे बनाए हैं। इस कार के मॉडल के प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद काइनेटिक को यह जिम्मेदारी दी गई। इस कंपनी ने नैनो का ट्रांसमिशन गियर बनाया है। बॉश से कार का इंजन मैनेजमेंट सिस्टम (ईएमएस) तैयार करने को कहा गया था। किसी कार के सभी कल-पुर्जों में यह पुर्जा थोड़ा ज्यादा जटिल होता है।
बॉश ने कंट्रोल यूनिट, सेंसर्स और एक्चुएटर्स का निर्माण किया है। नैनो के लिए इसने ब्लिंक मोड तैयार किए हैं। इससे बगैर डायग्नोस्टिक टूल के कार की हालत परखी जा सकती है। लागत नियंत्रित रखने के बावजूद बॉश ने ईएमएस फेल होने पर कार को ‘लिम्प-मोड’ में रखने की व्यवस्था की है।
नैनो जैसी छोटी कार में सैप इंजन के बगैर एयरकंडीशनर की सुविधा उपलब्ध कराना निश्चित तौर पर काफी महत्वपूर्ण है। बेर नामक जर्मन कंपनी ने इसे तैयार किया है। एचवीएसी मॉडयूल्स, मैनुअल कंट्रोल हेड और कंडेंसर को भी बेर ने ही तैयार किया है।
हालांकि इसके लिए उसने आनंद ऑटोमोटिव सिस्टम्स के साथ गठजोड़ किया है। मारुति 800 में इस्तेमाल होने वाले 50 सीसी से 10 सीसी ज्यादा के रोटरी कंप्रेसर का इस्तेमाल नैनो में किया गया है। इसे पैनासोनिक ने तैयार किया है।
कद्रदान हैं बहुत
बाजार में आने से पहले ही नैनो की बोली शुरू हो गयी है। कार बाजार की दुनिया में नैनो की ‘प्रीमियम’ 50,000 रुपये तक पहुंच चुकी है। यानी कि जिसे नैनो कार मिल गयी उसे 50,000 रुपये की अतिरिक्त कमाई हो जाएगी। ठंडे पड़े सेकेंड हैंड कार बाजार के डीलर और फाइनेंसर बुकिंग शुरू होने से पहले ही इस गणित में लग गए हैं।
कार डीलरों के मुताबिक, 50,000 रुपये की अतिरिक्त राशि देने के बाद भी नैनो की कीमत 2 लाख रुपये तक पहुंचेगी और फिलहाल बाजार में 2 लाख रुपये की कोई कार उपलब्ध नहीं है। दूसरी तरफ नैनो की बुकिंग 9 अप्रैल से शुरू होने की खबर से मंदा चल रहे सेकेंड हैंड कार बाजार में 10-15 फीसदी और गिरावट की आशंका है। पहली खेप में एक लाख नैनो कार की बुकिंग की जाएगी। जबकि बुकिंग कराने वालों की संख्या अकेले दिल्ली में ही 50 हजार से अधिक होने की संभावना है।
दक्षिण दिल्ली के कार डीलर राजीव पुरी कहते हैं, ‘नैनो की बुकिंग की जानकारी लेने के लिए उनके पास लगातार फोन आ रहे हैं।’ पटेल नगर के कार डीलर संजय कहते हैं, ‘नैनो पर बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों के खरीदारों की भी नजर हैं। और पहली खेप में नैनो की सवारी के लिए 2 लाख रुपये खर्च करने वालों की कमी नहीं है।’
पश्चिमी दिल्ली के कार डीलर राजेश आनंद कहते हैं, कार फाइनेंसर सबसे अधिक संख्या में नैनो की बुकिंग करेंगे। फाइनैंसरों को नैनो की बुकिंग में सीधा लाभ नजर आ रहा है।’ वे यह भी कहते हैं कि नैनो से सेकेंड हैंड कार का बाजार और ठंडा हो जाएगा। क्योंकि सबसे अधिक 1.50-2 लाख रुपये की कीमत वाली कारों की बिक्री सबसे अधिक होती है।