कच्चे तेल के दामों में हालिया तेजी से आने वाली तिमाही में भारतीय उद्योग जगत के मार्जिन और लाभ में तेज गिरावट आएगी। ऐतिहासिक रूप में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और एबिटा या सूचीबद्ध कंपनियों के परिचालन मार्जिन के बीच नकारात्मक संबंध रहा है। सबसे ज्यादा असर विनिर्माण कंपनियों और पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भर रहने वाली कंपनियों द्वारा महसूस किए जाने की उम्मीद है। आंकड़े बैंकों और वित्तीय तथा तेल और गैस कंपनियों सहित सभी क्षेत्रों पर असर पडऩे का संकेत दे रहे हैं।
दूसरी तरफ बैंक और गैर-बैंक वाले ऋणदाताओं के मार्जिन को नुकसान पहुंच रहा है, क्योंकि कच्चे तेल की अधिक कीमतों से बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि होती है और बॉन्ड की कीमतों में गिरावट आती है।
वित्त वर्ष 22 के पहले नौ महीने में यही रुझान नजर आ रहा था। अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान सभी सूचीबद्ध कंपनियों का परिचालन मार्जिन 100 आधार अंक तक गिरकर 25.1 प्रतिशत हो गया था, क्योंकि वित्त वर्ष 22 के पहले नौ महीनों के दौरान ब्रेंट कच्चे तेल के दाम वित्त वर्ष 21 के औसतन 45.5 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 74.7 डॉलर हो गए थे।
हालांकि विनिर्माण कंपनियों ने वित्त वर्ष 21 की तुलना में अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान मार्जिन में विस्तार दर्ज किया था।
विश्लेषक इसका श्रेय राजस्व में उछाल और ऊर्जा लागत में लगातार वृद्धि के बावजूद धातु और खनन कंपनियों के लाभ में वृद्धि को देते हैं। तिमाही नतीजे बताते हैं कि वित्त वर्ष 22 की तीसरी तिमाही में विनिर्माण कंपनियों के परिचालन मार्जिन में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए एफएमसीजी कंपनियों के मामले में यह परिचालन मार्जिन वित्त वर्ष 22 की दूसरी तिमाही के मुकाबले वित्त वर्ष 22 की तीसरी तिमाही में 60 आधार अंक कम था, जबकि वाहन पूर्जों के क्षेत्र यह मार्जिन वित्त 22 की तीसरी तिमाही पांच तिमाही के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
विश्लेषकों को अगली कुछ तिमाहियों के दौरान कंपनियों के मार्जिन में सबसे बड़ी गिरावट होती नजर आ रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले तीन महीने में कच्चे तेल के दामों में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई है। नवंबर 2021 के अंत में ब्रेंट कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो मार्च 2021 के आखिर के 65 डॉलर के मुकाबले केवल 7.7 प्रतिशत अधिक था। इसे तुलना करें, तो रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद गुरुवार को कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के स्तर को पार कर गए। वर्ष 2014 के बाद पहली बार ऐसा हुआ।
जेएम इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के प्रबंध निदेशक और मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा कि मैं वित्त वर्ष 23 और वित्त वर्ष 24 में कॉरपोरेट आय में बड़ी गिरावट देख रहा हूं, क्योंकि कच्चे तेल की अधिक कीमतों और ब्याज दरों के संयोजन से हर क्षेत्र में मार्जिन कम हो जाता है।