सज्जन जिंदल के नेतृत्व वाली कंपनी जेएसडब्ल्यू एनर्जी कोविड-19 के कारण पैदा हुई अनिश्चितता के मद्देनजर जीएमआर कमलांगा एनर्जी के अधिग्रहण से पीछे हट गई है। कंपनी ने आज यह खुलासा किया। कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के लक्ष्य के साथ कंपनी कोयले से चलने वाले अपने सभी मौजूदा संयंत्रों को 2050 तक बंद करना चाहती है।
जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने अपने बयान में जीएमआर सौदे के बारे में कहा है, ‘लंबे समय तक रुकने के बाद दोनों पक्षों ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण पैदा हुई अनिश्चिता के मद्देनजर इस लेनदेन को रद्द करने के लिए आपसी सहमति दी है।’ प्रबंधन ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों पर बिना किसी लागत बोझ के इस सौदे को रद्द किया गया है।
जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने फरवरी में कहा था कि वह 5,321 करोड़ रुपये में इस परियोजना का अधिग्रहण करेगी लेकिन उसे मई तक के लिए टाल दिया गया था। इस परियोजना के तहत ओडिशा में 1,050 मेगावॉट क्षमता की कोयला आधारित बिजली परिसंपत्तियां शामिल हैं।
जेएसडब्ल्यू ने वर्ष 2050 तक कोयला आधारित संयंत्रों को पूरी तरह बंद करने का भी लक्ष्य रखा है। कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी प्रशांत जैन ने कहा, ‘हमारा विचार यह है कि अब हम कोयला आधारित संयंत्रों में निवेश नहीं करेंगे। हम मुख्य तौर पर नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करेंगे। कोयला संयंत्रों में हमारा जो भी निवेश है उसे हम 2050 तक पूरी तरह समेटना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा कि कंपनी नवीकरणीय बिजली उत्पादन क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी के विजयनगर और रत्नागिरि बिजली संयंत्र कोयला आधारित परिसंपत्तियां हैं। कंपनी 2030 तक अपनी नवीकरणीय क्षमता को दो-तिहाई बढ़ाने की योजना बना रही है। जेएसडल्ब्यू एनर्जी फिलहाल 4,559 मेगावॉट बिजली का उत्पादन करती है। इसमें 3,158 मेगावॉट ताप विद्युत संयंत्रों से, 1,391 मेगावॉट पनबिजली संयंत्रों से और 10 मेगावॉट सौर संयंत्रों से बिजली का उत्पादन होता है।
जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने आज जून तिमाही के वित्तीय नतीजों की घोषणा की। तिमाही के दौरान कंपनी का कर पूर्व लाभ 8 फीसदी घटकर 298.28 करोड़ रुपये रह गया जो एक साल पहले की समान तिमाही में 325.58 करोड़ रुपये रहा था। तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 13 फीसदी घटकर 213 करोड़ रुपये रह गया जो एक साल पहले की समान तिमाही में 244 करोड़ रुपये रहा था।
कंपनी ने कहा है कि कोविड-19 संबंधी लॉकडाउन एवं पाबंदियों के बीच कमजोर आर्थिक गतिविधियों के कारण जून तिमाही में देश में बिजली की मांग में सालाना आधार पर 16.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसलिए तिमाही के दौरान जेएसडब्ल्यू एनर्जी का कुल उत्पादन भी 16 फीसदी घटकर 493 करोड़ यूनिट रह गया।
जैन ने कहा कि कंपनी की 95 फीसदी एबिटा उत्पादन क्षमताओं पर निर्भर करत है जो बिजली खरीद अनुबंधों (पीपीए) के साथ बंधी है। पीपीए में अधिक निवेश के कारण जेएसडब्ल्यू एनर्जी की वित्तीय स्थिति कम प्रभावित हुई है। तिमाही के दौरान एबिटा एक साल पहले की समान तिमाही के मुकाबले 4 फीसदी घटकर 827 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल जून तिमाही में यह आंकड़ा 861 करोड़ रुपये रहा था।
जैन ने उम्मीद जताई कि बिजली की मांग में अक्टूबर तक पूरा सुधार हो जाएगा जबकि जुलाई के दौरान इसमें 3.5 फीसदी की गिरावट आई। जून तिमाही में कंपनी ने करीब 450 करोड़ रुपये के शुद्ध ऋण की अदायगी की।