जेएसडब्ल्यू एनर्जी निजी क्षेत्र की चुनिंदा बिजली उत्पादकों में शामिल है, जो पनबिजली पर दांव लगा रही है। कंपनी के राजस्व को बढ़ाने में पनबिजली की भूमिका अहम रही है और जेएसडब्ल्यू पनबिजली की बड़ी परियोजनाओं पर दांव लगाने की योजना बना रही है।
जेएसडब्ल्यू एनर्जी के संयुक्त प्रबंध निदेशक और सीईओ प्रशांत जैन ने कहा, हम पनबिजली क्षेत्र को लेकर आशावान हैं, खास तौर से बिजली मंत्रालय की तरफ से एचपीओ अधिसूचना के बाद से। इससे पनबिजली के क्षेत्र में और बिजली खरीद करार पर हस्ताक्षर हो पाएंगे। हम पनबिजली की बड़ी परियोजनाओं पर विचार रहे हैं क्योंकि हमारी स्थिति हमें छोटी पनबिजली परियोजनाओंं पर निवेश की इजाजत नहीं देता।
जेएसडब्ल्यू अभी 1.3 गीगावॉट पनबिजली परियोजनाओं का परिचालन कर रही है। हाल में हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने जेएसडब्ल्यू एनर्जी की बिजली खरीद पेशकश को मंजूरी दी है, जो 240 मेगावॉट पनबिजली की आपूर्ति के लिए है। कंपनी वित्त वर्ष 2024-25 तक परियोजना चालू होने की उम्मीद कर रही है।
29 जनवरी की अधिसूचना में केंद्रीय मंत्रालय ने अनिवार्य एचपीओ को साल 2030 तक बढ़ा दिया है। केंद्र का इरादा साल 2030 तक 30 गीगावॉट पनबिजली जोडऩे का है। एचपीओ में राज्यों की तरफ से कुल ऊर्जा मांग के प्रतिशत के तौर पर अनिवार्य पनबिजली खरीद की बात कही गई है।
पिछले हफ्ते तीसरी तिमाही के नतीजे की घोषणा करने वाली कंपनी ने पनबिजली इकाइयों से राजस्व में बढ़ोतरी देखी। जैन ने कहा, हमारे कारोबार पर कोविड का बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ क्योंकि ये आवश्यक सेवाएं हैं और पनबिजली, सौर व पवन ऊर्जा इकाइयों को संचालित करना आवश्यक है।
जैन ने कहा, पहली तिमाहियों में ही असर देखने को मिला था, तब बिजली की मांग में कमी आई थी। लेकिन तीसरी तिमाही के बाद बिजली की मांग बढ़ी है और मौजूदा तिमाही में भी बिजली की मांग 4-5 फीसदी बढ़ रही है।