facebookmetapixel
Advertisement
Pricol क्यों कर रही है डीमर्जर? कंपनी ने बताया आगे का बड़ा प्लान8% से कम ब्याज पर लोन नहीं! बड़े बिल्डरों को मना कर रही LIC Housing Finance, जानिए क्यों बदली रणनीतिBajaj Finserv Direct के ब्रेक-ईवन का समय तय, कंपनी ने दी नई समयसीमाStock Market Update: सेंसेक्स 100 अंक चढ़ा, Nifty 24,600 के करीब; रियल्टी और प्राइवेट बैंक शेयरों ने डाला दबावBank Holiday Alert: अगस्त में कई दिन बंद रहेंगे बैंक, ब्रांच जाने से पहले जरूर देखें छुट्टियों की पूरी लिस्टसिगरेट कारोबार को झटका, मगर FMCG ने संभाला ITC; क्या बदल रही है कंपनी की असली पहचान?Stocks To Watch Today: Adani Group से लेकर LIC और Paytm तक, आज इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजरसरकार लाई नया Tax Amendment Bill, गिफ्ट सिटी, विदेशी निवेश कोष और डेटा सेंटर को मिलेंगी टैक्स में छूटManufacturing PMI जुलाई में पांच साल के निचले स्तर पर, कमजोर मांग और बिक्री से सुस्त पड़ा विनिर्माण क्षेत्रFCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकों की CD पर निर्भरता घटी, जुलाई में 95 हजार करोड़ रुपये जुटाए

कोडिंग ही काफी नहीं! AI के दौर में अब डेवलपर्स को सॉफ्ट स्किल्स में भी बनना होगा माहिर

Advertisement

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के आने के बाद कई कोडिंग के स्वचालित हो जाने से सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए ये खूबियां जरूरी हो गई हैं।

Last Updated- April 07, 2025 | 11:00 PM IST
artificial intelligence
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Pixabay

भविष्य में सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनियों को समस्या निवारण, स्पष्ट संवाद और आगे बढ़ने की सोच जैसी खूबियों के साथ तैयार रहना होगा। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के आने के बाद कई कोडिंग के स्वचालित हो जाने से सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए ये खूबियां जरूरी हो गई हैं। गिटहब के मुख्य परिचालन अधिकारी काइल डेगल ने यह बात कही।

डेगल ने कहा कि कोड दुरुस्त एवं भरोसेमंद बनाने के लिए इन कंपनियों को न केवल कोडिंग सीखनी होगी बल्कि इस पर भी नजर रखनी होगी कि एआई एजेंट क्या कर रहे हैं।

पहली बार भारत यात्रा पर आए डेगल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से एक खास बातचीत में कहा, ‘कोडिंग सीखने से कोड लिखने की क्षमता मिल जाती है, लेकिन इसे सिखाना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है और यह प्रणाली इसी तरह काम करती है।’  उन्होंने कहा कि एक डेवलपर के तौर पर तकनीक मुझे अधिक ताकतवर बनाएगी। डेगल ने कहा कि ओपन सोर्स के जरिये उन समस्याओं का समाधान अब आसान हो गया है जो पहले वित्तीय तौर पर असंभव लगते थे।

उन्होंने कहा, ‘समस्या निवारण सुनने में जितना सरल लगता है उतना सरल है नहीं। इसके लिए कई प्रकार के कौशल सीखने पड़ते हैं। सॉफ्टवेयर विकसित करने की क्या जरूरत है, इसे कैसा विकसित किया जाए और हम इस काम में कैसे असफल हो सकते हैं आदि कुछ गंभीर सवाल हैं। डेवलपरों के साथ खुले संवाद भी काफी महत्त्वपूर्ण होते हैं।‘

उन्होंने कहा कि कंपनियों को आगे बढ़ने की सोच रखनी होगी। डेगल ने कहा, ‘इसका मतलब कुछ नई चीज सीखने की ललक होनी चाहिए और किसी तरह के बदलाव से डरना नहीं चाहिए। तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि अब यह अनुमान लगाना भी मुश्किल हो गया है कि अगले तीन महीनों में क्या होगा।‘

उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि स्वचालन से भारत में सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनियों (डेवलपर) की संख्या कम हो जाएगी। अमेरिका के बाद भारत गिटहब के लिए दूसरा सबसे बड़ा डेवलपर देश है। अमेरिका की इस कंपनी को लगता है कि 2028  तक भारत डेवलपर का सबसे बड़ा देश बन जाएगा। भारत में इस समय 1.8  करोड़ ओपन सोर्स डेवलपर हैं और हरेक तिमाही इनकी संख्या 10 लाख बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘हमने 1  अरब डेवलपर जोड़ने का साहसिक लक्ष्य रखा है और यह लक्ष्य भारत की मदद से ही पूरा होगा।‘

इस सवाल पर कि जेन एआई उम्मीद के अनुरूप क्यों नहीं अपनाई गई है,  डेगल ने कहा कि इसके लिए काफी हद तक एआई यूज केस को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। विशेषज्ञों ने इसके लिए प्रबंधन में बदलाव और उन समस्याओं को जिम्मेदार माना है जिन्हें जेनएआई की मदद से दूर करने का लक्ष्य रखा गया था।

उन्होंने कहा, ‘इन कार्यों में जब आप जेनएआई को लाने की कोशिश करते हैं तो समस्या खड़ी हो जाती है। इस वजह से कार्य करने का तरीका बदलना पड़ता है या चैट यूजर अनुभव से गुजरना पड़ता है। मुझे लगता है कि दूसरों को अलग तरीके से सोचने के लिए कहने से जुड़े दर्द को हम ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं।‘

Advertisement
First Published - April 7, 2025 | 10:36 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement