उद्योग और व्यापार संगठनों ने अस्पताल के कमरों के शुल्क पर कर वसूलने और बिना पैकेट वाले उपभोक्ता उत्पादों को कर दायरे में लाने के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद के हालिया निर्णय पर आपत्ति जताई है।
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सेवाओं को जीएसटी से छूट देने और सेवा प्रदाताओं को इनपुट कर क्रेडिट की सुविधा देने की मांग की है। फिक्की ने पत्र में लिखा है कि ऐसा करने से न केवल इनपुट कर क्रेडिट श्रृंखला बरकरार रहेगी बल्कि अनुपालन में भी आसानी होगी और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में इनपुट कर का बोझ नहीं पड़ेगा। पत्र में कहा गया है कि अस्पताल उद्योग अतीत में कई बार सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं को जीएसटी से बाहर करने का अनुरोध कर चुका है।
जीएसटी परिषद ने अस्पताल में 5,000 रुपये प्रतिदिन किराये वाले कमरों (आईसीयू को छोड़कर) पर 5 फीसदी कर लगाया है और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट शोधन संयंत्रों पर 12 फीसदी से ज्यादा का कर लगया गया है। इससे मरीजों का इलाज महंगा हो जाएगा।
इस बीच कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भी गैर-ब्रांडेड पैकेटबंद उत्पादों को जीएसटी दायरे में लाने पर नाखुशी जताई है। कैट ने कहा कि इससे देश भर के खाद्य कारोबारियों को भारी नुकसान होगा। उसके अनुसार इस निर्णय से बड़े ब्रांडों को फायदा होगा और वे छोटे विनिर्माताओं और कारोबारियों से बाजार हथिया सकते हैं।