प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
इस साल की शुरुआत में निवेशक और सन माइक्रोसिस्टम्स के सह-संस्थापक विनोद खोसला ने आगाह किया था कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) लगभग पूरे बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) उद्योग को खत्म कर सकता है। खोसला ने यह बात जीरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामत के पॉडकास्ट पर कही। हालांकि, कई लोगों ने ऐसी भविष्यवाणियों पर सहमति जताई लेकिन इस क्षेत्र ने सालों बाद सबको चौंकाया है और यह कैपजेमिनाई द्वारा डब्ल्यूएनएस के 3.3 अरब डॉलर के अधिग्रहण के कारण हुआ।
इस सौदे ने बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (बीपीएम) के भविष्य पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है। और यह न केवल आईटी सेवाओं के सहायक के तौर पर कम मार्जिन वाले, श्रम-प्रधान उद्योग के रूप में बल्कि एक ऐसे व्यवसाय के रूप में उभरा है जिसे एआई वाले परिचालन मॉडल के साथ दोबारा तैयार किया जा रहा है।
अधिग्रहण के तर्क को समझाते हुए कैपजेमिनाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ऐमान एजात ने कहा कि बीपीएम उद्योग सबसे तेजी से बढ़ती श्रेणियों में एक बना हुआ है। एजात ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘यह देखना दिलचस्प है कि जिस कारोबार के बारे में कई लोगों ने मान लिया था कि वह आखिरकार खत्म हो जाएगा, वास्तव में वही सबसे तेजी से बढ़ रहा है।’
उन्होंने कहा, ‘हमारा लिए बड़ा अवसर यह है कि हम किसी भी काम की शुरुआत से लेकर अंत तक करने के तरीके को पूरी तरह बदल दें। उदाहरण के तौर पर बीमा में दावे की प्रक्रिया को लें। आप इसे फिर से डिजाइन कर सकते हैं और एआई, जेनेरेटिव एआई और एजेंटिक एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे काम और भी बेहतर तरीके से हो पाएगा। लेकिन इस तरह का बदलाव जटिल है और इसके लिए बेहद बारीक स्तर पर प्रक्रियाओं को परिभाषित करने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएनएस हमें यही बारीकी से समझने और काम करने की क्षमता देता है।’
बीपीएम सेक्टर लंबे समय से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग का झंडाबरदार रहा है और अब यह महत्त्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच रहा है। वर्ष 2026 सबसे अहम वर्ष है जब उद्योग पारंपरिक बीपीएम से एआई परिचालन से जुड़ेगा और इसमें लोगों के संचालन की अहम भूमिका होगी। दशकों से, यह उद्योग आईटी कंपनियों की तरह ही कर्मचारियों की संख्या पर आधारित काम, तय कीमतों वाले मॉडल और श्रम आधारित परिचालन कार्यों पर निर्भर था। लेकिन एआई और जेन एआई का प्रभाव इस तरीके को बदल रहा है।
एचएफएस रिसर्च में शोध और परामर्श के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता कहते हैं, ‘यह उद्योग अगले दो वर्षों में बहुत अलग दिखेगा। बीपीओ प्रदाताओं को एजेंटिक एआई में भारी निवेश की आवश्यकता है क्योंकि वही बचे रहेंगे। उन्हें प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ खुद में नए बदलाव करने होंगे जो बीपीओ क्षेत्र में भी आ रहे हैं। सामान्य बीपीओ सबसे बुरी तरह से प्रभावित होंगे और वही बचे रहेंगे जो ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप प्रासंगिक सेवाएं देंगे।’
उद्योग संगठन नैसकॉम के अनुसार बीपीएम उद्योग का आकार वित्तीय वर्ष 2024-25 में 54.6 अरब डॉलर था। इस उद्योग में सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का है जो कुल कमाई का लगभग आधा हिस्सा है और यूरोप इसमें लगभग 30 फीसदी का योगदान देता है।