आईसीएआई की नजर कंपनियों के खातों पर!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 12:55 AM IST

सत्यम प्रकरण से सबक लेते हुए देश में चार्टर्ड अकाउटेंट्स की सर्वोच्च संस्था इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड अकाउटेंट ऑफ इंडिया आगे से कंपनियों की इंटर्नल ऑडिट की मॉनिटरिंग आउटसोर्स कराने की योजना बना रही है।
आईसीएआई का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो कंपनियों की इंटर्नल ऑडिटिंग के समय ज्यादा पारदर्शिता बरती जा सकेगी। इस बाबत आईसीएआई के अध्यक्ष उत्तम प्रकाश अग्रवाल का कहना है कि सत्यम प्रकरण में गठित उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा।
अग्रवाल का कहना है कि इंटर्नल ऑडिटिंग होने पर चार्टर्ड अकाउटेंट के ऊपर कंपनी प्रंबधन का दबाव रहता है। ऐसे में ऑडिटिंग में गड़बड़ी की संभावना बढ़ जाती है। कई बार सीए गड़बड़ी होने की बात को जाहिर भी कर देते हैं, तो उचित कार्यवाही न होने से बात दबा दी जाती है।
गौरतलब है कि भारत में कंपनियों के लिए कारोबार की एक तयशुदा सीमा पार कर लेने के बाद कंपनियों को इंटर्नल ऑडिटिंग कराना जरूरी हो जाता है। लेकिन कुछेक कंपनियां इसका फायदा उठाते हुए अपनी माली हालत को छुपाने के लिए इंटर्नल ऑडिटिंग में गड़बड़ी करने की कोशिश करती है।
ऐसे में अब यह जरूरी हो गया है कि अगर कोई कंपनी इंटर्नल ऑडिटिंग करवा रही है, तो उसकी मॉनिटरिंग आउटसोर्स की जाए। इंटर्नल ऑडिटिंग की मॉनिटरिंग आउटसोर्स होने से चार्टर्ड अकाउंटेंट भी दबाव से मुक्त रहेगा, साथ ही ऑडिटिंग में तथ्यों के साथ खिलवाड़ करना भी आसान नहीं रहेगा।

First Published : February 12, 2009 | 11:51 PM IST