मार्च में जिनेवा में हुए मोटर शो में नैनो के यूरोपीय संस्करण यूरोपा को दिखाते हुए टाटा मोटर्स ने कहा था कि नैनो की बॉडी सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह से खरी उतरने का भरोसा दिलाया था।
वैसे अगर हम नैनो के सुरक्षा की बात करें, तो इसके बॉडी शेल से शुरू करना ज्यादा बेहतर होगा। परंपरागत कारों की तरह नैनो की बॉडी चेसिस पर आधारित नहीं है। वैसे कार के बोनट, दरवाजे और बंपर इत्यादि को इस तरह से बनाया गया है कि इसकी मजबूती को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो। इस वजह से नैनो अन्य कारों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित नजर आती है।
इस बाबत हम यह कह सकते हैं कि मर्सिडीज बेंज स्मार्ट में जब एल्युमिनियम का प्रयोग किया जाता है, तो यह सुरक्षित तो अधिक होती है, लेकिन इससे खर्च बढ़ जाता है। नैनो में उन सारी सुरक्षा तत्वों को शामिल किया गया है, जो भारत की पैसेंजर कारों में होनी चाहिए।
इसके अलावा यहां तक कहा जा सकता है कि नैनो में उन सुरक्षा मानकों का भी इस्तेमाल किया गया है, जो अभी तक भारतीय वाणिज्यिक कारों में नहीं किया गया है। अभी तक कारों में स्टीयरिंग ह्वील का प्रभाव, फ्रंट भाग की मजबूती, स्टीयरिंग सिस्टम पर बॉडी ब्लॉक का प्रभाव, सीट बेल्ट की शक्ति आदि का ख्याल रखा जाता है।
ये सारी बातें नैनो में तो हैं ही, इसके अलावा इसमें रूफ क्रश को भी शामिल किया है, ताकि गाड़ी के पलटने की स्थिति में भी ज्यादा नुकसान न हो। नैनो में ऑफसेट फ्रंटल इंपैक्ट और साइड इंपैक्ट दोनों का ख्याल रखा गया है। इसके फ्रंट में क्रंपल जोन बनाया गया है और इसके दरवाजे को काफी मजबूत बनाया गया है।