जरूरत से ज्यादा रफ्तार खतरनाक हो सकती है। अदाणी समूह के शेयरों में इस साल हुई तीव्र बढ़ोतरी से एमएससीआई ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होने की उसकी संभावनाओं को झटका लग सकता है।
अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी टोटाल गैस और अदाणी ट्रांसमिशन के शेयर इस साल दोगुने से भी ज्यादा हो चुके हैं। तीनों शेयर इंडेक्स में शामिल होने के मौजूदा मानदंडों को पूरा करते हैं और इस लिहाज से एमएससीआई स्टैंडर्ड ग्लोबल इंडेक्स में शामिल किए जाने के लिहाज से अग्रिम पंक्ति में हैं। यह कहना है विश्लेषकों का। इस कदम से एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों की तरफ से संचयी तौर पर करीब 4,200 करोड़ रुपये की खरीदारी हो सकती है।
हालांकि एमएससीआई बाजार की प्रतिक्रिया चाह रहा है कि क्या अधिकतम कीमत बढ़ोतरी अपात्रता मानक हो सकता है। सूचकांक प्रदाता ने इस संबंध में फरवरी में चर्चा पत्र सामने रखा है। बुधवार तक उसने मनी मैनेजरों की राय हासिल कर ली है और 16 अप्रैल से पहले प्रस्ताव पर अपनी चर्चा का ऐलान करेगा।
एडलवाइस ऑल्टरनेटिव रिसर्च के विश्लेषक अबिलाश पगारिया ने कहा, पिछले तीन महीने में अदाणी समूह के शेयर काफी ज्यादा चढ़े हैं। एगर एमएससीआई कीमत की चाल पर नियम तय करता है तब यह उन शेयरों के सूचकांक में शामिल होने के लिहाज से अवरोध के तौर पर काम कर सकता है।
बाजार के विशेषज्ञों ने कहा कि बाजार के प्रतिभागी एमएससीआई के फैसले का इंतजार करेंगे। एक विश्लेषक ने कहा, अगर सूचकांक प्रदाता इस प्रस्ताव को टालने का फैसला लेता है तो अदाणी समूह के तीनों शेयरों में मई में एमएससीआई के अर्धवार्षिक पुनर्संतुलन से पहले तेजी आ सकती है। ईटीएफ बड़ी मात्रा में इन शेयरों को खरीदने के लिए बाध्य होंगे।
50 अरब डॉलर से ज्यादा परिसंपत्तियों वाले फंड एमएससीआई स्टैंडर्ड ग्लोबल इंडेक्स को ट्रैक करते हैं। पगारिया ने कहा, आगामी समीक्षा को लेकर हमारा शुरुआती विश्लेषण बताता है कि अदाणी समूह के शेयरों को बड़ी जीत हासिल होगी क्योंकि हमें लगता है कि उनमें संयुक्त रूप से 60-70 करोड़ डॉलर का निवेश आएगा।
अपने पर्चा पत्र में एमएससीआई ने अधिकतम कीमत बढ़ोतरी को एक महीने, दो महीने या तीन महीने के लिहाज से एमएससीआई ऑल कंट्री वल्र्ड इंडेक्स में रिटर्न को कम से कम 2 गुना, तीन गुना और चार गुने के तौर पर पारिभाषित किया है। सामान्य शब्दों में अगर एमएससीआई एसीडब्ल्यूआई पहली तिमाही 2021 में 10 फीसदी बढ़ता है तो किसी शेयर में 40 फीसदी या उससे ज्यादा बढ़ोतरी को अधिकतम कीमत बढ़ोतरी माना जाएगा।
बाजार पर नजर रखने वालों ने कहा कि एमएससीआई का कदम अन्य सूचकांक प्रदाताओं मसलन एफटीएसई या देसी कंपनियों मसलन एनएसई सूचकांकों व एशिया इंडेक्स के लिए दृष्टांत तय कर सकता है।
एक अन्य विश्लेषक ने कहा, कभी-कभार ऐसा देखा गया है कि शेयर को इंडेक्स मेंं तब शामिल किया जाता है जब उसका प्रदर्शन सबसे अच्छा होता है। इसलिए अधिकतम कीमत बढ़ोतरी का मानक तार्किक नजर आता है। हालांकि किसी मौजूदा शेयर को इंडेक्स से बाहर निकालने की खातिर शामिल होने वाले शेयर को बढ़त हासिल करनी होती है। यह देखना बाकी है कि सूचकांक प्रदाता यह सुनिश्चित करने के लिए किस तरह से संतुलन बनाते हैं कि शेयर में बढ़ोतरी हो, लेकिन उस हद तक न हो कि वह निवेशकों के लिए जोखिम बन जाए।