घरेलू पेंट उद्योग में एक नई कंपनी दस्तक देने जा रही है। ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने अधिक मार्जिन वाले पेंट कारोबार में उतरने की घोषणा की है। कंपनी ने अगले तीन वर्षों के दौरान 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से इस कारोबार में प्रवेश करने की योजना बनाई है। इसके तहत कंपनी मुख्य तौर पर देश के भीतर विभिन्न जगहों पर नई क्षमता जोडऩे के लिए निवेश करेगी।
कंपनी ने बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनने की योजना बनाई है। साथ ही कंपनी ने इसमें 20 फीसदी आंतरिक रिटर्न दर (आईआरआर) को लक्ष्य किया है। इसे हासिल करने के लिए कंपनी अपनी सहायक इकाई अल्ट्राटेक सीमेंट के वितरण नेटवर्क का फायदा उठाने की मंशा जताई है। अल्ट्राटेक का बिड़ला व्हाइट ब्रांड पुट्टी के लिए काफी लोकप्रिय है और उसके व्हाइट सीमेंट की पहुंच 35,000 से 40,000 पेंट वितरकों तक है।
हालांकि निवेशकों ने कंपनी के इस कदम की सराहना की है और इसलिए कारोबार के दौरान उसके शेयर में 6.4 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई। लेकिन विश्लेषकों का मानना ??है कि आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी का इस बाजार में मौजूदा खिलाडिय़ों पर सीमित प्रभाव दिख सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में हाल में दस्तक देने वाली अन्य कंपनियों के मुकाबले ग्रासिम कहीं बेहतर स्थिति में है लेकिन वितरण नेटवर्क के मोर्चे पर उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा इस कारोबार में पहले से ही स्थापित मौजूदा कंपनियों की मजबूत ब्रांड इक्विटी भी उसके लिए एक प्रमुख चुनौती होगी।
विश्लेषकों ने बताया कि व्हाइट सीमेंट अथवा पुट्टी के मुकाबले पेंट कारोबार की स्थिति बिल्कुल अलग है क्योंकि इसके लिए खुदरा विक्रेताओं के साथ मजबूत संबंध के अलावा एक दमदार समग्र वितरण नेटवर्क की आवश्यकता होती है। उनके वितरण नेटवर्क का सफलतापूर्वक विस्तार काफी हद तक संभावित डीलर पार्टनर के साथ ब्रांड की पहचान और नई जगहों पर उनकी टिंटिंग मशीन की स्वीकार्यता पर निर्भर करता है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में उतरने वाली नई कंपनियों के लिए यही सबसे बड़ी बाधा रही है।
एडलवाइस सिक्योरिटीज के अनुसंधान विश्लेषक अबनीश रॉय ने कहा, ‘ऐतिहासिक तौर पर हमने जेएसडब्ल्यू, जोतुन, निप्पॉन आदि नई कंपनियों का एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स जैसी मौजूदा पेंट कंपनियों पर कोई खास प्रभाव नहीं देखा है। पेंट कारोबार में उतरने की एक बड़ी बाधा वितरण नेटवर्क है क्योंकि पेंट की अधिकतर दुकान काफी छोटी होती है जहां आमतौर पर दो कंपनियों की टिंटिंग मशीन रखने की जगह होती है।’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा नई कंपनी को लगातार विज्ञापन पर काफी खर्च करने की आवश्यकता होती है।
अगली चुनौती ग्राहकों के लिए ब्रांड के प्रति निष्ठा होती है। कोटक इंस्टीट््यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने कहा, ‘पेंटिंग छह से सात वर्षों में एक बार कराने वाली गतिविधि है और इसलिए ब्रांड के प्रति ग्राहकों की निष्ठा काफी महत्त्वपूर्ण होती है। स्मार्ट विज्ञापन के साथ शीर्ष चार कंपनियों (65 फीसदी बाजार हिस्सेदारी) के पास दमदार ब्रांड हैं और ग्राहकों का उनसे काफी भावनात्मक लगाव है। इसलिए नए ब्रांड की ओर उनका झुकाव कम होता है।’ आज तीन शीष्र पेंट शेयरों में 3 से 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।