टीका बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने कोविशील्ड के पूर्ण विपणन अधिकार के लिए आवेदन किया है। एसआईआई के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। पूनावाला ने ट्विटर पर लिखा, ‘भारत में कोविशील्ड टीके की आपूर्ति का आंकड़ा 1.25 अरब खुराक से अधिक हो गया है। पूर्ण विपणन का अधिकार देने के लिए भारत सरकार के पास अब पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध हो गए हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उनकी कंपनी ने सरकार से इस टीके के पूर्ण विपणन अधिकार के लिए आवेदन किया है।’
पिछले वर्ष जनवरी में सरकार ने आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए कोविशील्ड को मंजूरी दी थी। कंपनी अब प्रत्येक महीने इस टीके की 25 करोड़ खुराक बनाने की क्षमता हासिल कर चुकी है। देश में अब कोविड-19 महामारी से बचाव के जितने टीके लगाए गए हैं उनमें कोविशील्ड की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत है। सरकार आपात स्थिति में किसी जानलेवा बीमारी की पहचान, इसकी रोकथाम से बचाव के लिए सीमित आंकड़ों के आधार पर अस्थायी तौर पर किसी दवा या टीके के इस्तेमाल की अनुमति देती है। उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल के लिए पूर्ण अनुमति देने से पहले दवा नियामक अधिक से अधिक तथ्यों एवं साक्ष्यों का अध्ययन करता है।
इकनॉमिकल लॉज प्रैक्टिस (ईएलपी) में पार्टनर (मुकदमा एवं विवाद समाधान व्यवहार) आशिष प्रसाद ने कहा कि परीक्षण के तीनों चरणों के बाद आए सभी आकड़ों का अध्ययन करने के बाद दवा नियामक किसी दवा या टीके के पूर्ण इस्तेमाल की अनुमति देता है और उसके बाद संबंधित उत्पाद को सार्वजनिक बाजार में बिक्री के लिए सुरक्षित एवं उपयुक्त समझा जाता है। आपात स्थिति में दवा नियामक त्वरित गति से पहले और दूसरे चरण के परीक्षण के आंकड़ों पर विचार करने के बाद किसी टीके या दवा के सीमित इस्तेमाल की अनुमति देता है। हालांकि इस प्रक्रिया में भी सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाता है।
कोविड-19 महामारी के दौरान टीकों को विभिन्न देशों आपात स्थिति में इस्तेमाल की अनुमति मिली है। अगस्त में अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (यूएसएफडीए) ने फाइजर-बायोनटेक की एमआरएनए तकनीक पर तैयार टीके को पूर्ण विपणन अधिकार दिया था। अब कॉमिरनटी नाम से इसकी बाजार में बिक्री हो रही है। कोविड-19 के सुरक्षित एवं असरदार टीके के विकास के लिए 2020 में गतिविधियां शुरू हुई हैं। इससे पहले इस दिशा में कभी प्रयास नहीं हुआ था। परीक्षणों के बाद आंकड़ों की त्वरित समीक्षा का यह मतलब नहीं है कि टीका तैयार करने में जल्दबाजी की गई है। टीके के परीक्षण के दौरान सभी आवश्यक मानदंडों का कड़ाई से पालन हुआ है। जिन लोगों पर टीके का परीक्षण हुआ है उनकी नियुक्ति तेजी से हुई है और नियामक विभिन्न परीक्षणों के आंकड़ों पर समय-समय पर विचार करता रहा है। अंतरिम स्तर पर आंकड़ों का परीक्षण पहले नहीं हुआ था। नियामक परीक्षण खत्म होने के बाद आंकड़ों की समीक्षा किया करते थे। अब एक दूसरा अहम पहलू समय है। नियामकों को यह देखना होता है कि टीका किसी बीमार से लडऩे के लिए दीर्घ अवधि तक शरीर में प्रतिरोधी क्षमता विकसित करता है या नहीं। कोई टीका रोगाणु से लडऩे के लिए ऐंटीबॉडी पैदा कर सकता है मगर यह देखना जरूरी है कि शरीर में मेमरी-सेल प्रतिरोधी क्षमता तैयार हुई है या नहीं। इसका मतलब हुआ कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय के बाद रोगाणु के संपर्क में आता है तो उसके शरीर में ऐंटीबॉडी बनती है या नहीं।
आपात स्थिति में इस्तेमाल की स्थिति में टीका बनाने वाली किसी कंपनी के पास दीर्घ अवधि के आंकड़े उपलब्ध नहीं होते हैं। अब जबकि अरबों लोगों को टीके लग चुके हैं इसलिए वृहद स्तर पर साक्ष्य एवं आंकड़े भी उपलब्ध हो गए हैं। इस आधार पर दवा नियामक किसी टीके लाभ एवं जोखिम का पूर्ण विश्लेषण कर सकते हैं। कुछ महीने पहले तक यह स्थिति नहीं बनी थी।