फ्यूचर समूह की कंपनियों की बिक्री और लाभ में भारी गिरावट आ रही है, इसलिए निवेश बैंकरों का कहना है कि उनके मूल्यांकन में भी पिछले एक साल के दौरान काफी कमी आई है। कोविड-19 संकट का असर अगली तीन तिमाहियों पर पडऩे के आसार हैं। इसलिए बैंकरों को लगता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) फ्यूचर समूह की 25,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों का नए सिरे से मोलभाव कर सकती है।
दिसंबर 2020 में समाप्त तिमाही के दौैरान फ्यूचर समूह की सभी कंपनियों का राजस्व कुल मिलाकर 3,228 करोड़ रुपये रहा और उन्हें कुल 1,450 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। कोविड से पहले की दिसंबर तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर, 2019 के दौरान उनकी बिक्री 9,652 करोड़ रुपये रही थी और उन्होंने कुल 250 करोड़ रुपये का मुनाफा हासिल किया था। महामारी के कारण लोग रिटल स्टोरों में फटक ही नहीं रहे हैं, इसलिए 2021-22 के लिए भी अनुमान बहुत निराशाजनक है।
फिच रेटिंग्स के विश्लेषकों ने कहा कि भारत में कोरोनावायरस के फिर जोर पकडऩे के कारण फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) के पास पहले जैसी परिचालन नकदी आने में वक्त लग जाएगा। वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में भी परिचालन नकदी की आवक कम रही है। इससे फ्यूचर रिटेल का अधिक मार्जिन वाला गैर एफएमसीजी कारोबार प्रभावित होगा। इस कारोबार पर महामारी से संबंधित प्रतिबंधों की ज्यादा मार पड़ रही है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि फ्यूचर रिटेल को कर्ज भी नहीं मिल रहा, इसीलिए उसे ‘एकबारगी पुनर्गठन योजना’ के तहत नए अनुदान नहीं मिले।
निवेश बैंकरों ने कहा कि आरआईएल-फ्यूचर सौदा एमेजॉन के मुकदमे में फंस गया था और एमेजॉन इस सौदे के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय चली गई है। इस वजह से सौदा पूरा होने में देर हो रही है। एमेजॉन इस सौदे के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में चली गई है, जिससे सौदा पूरा होने में देरी हो रही है। एक बैंकर ने कहा, ‘इस बात के बहुत ज्यादा आसार हैं कि हाल के घटनाक्रम देखते हुए आरआईएल सौदे पर दोबारा मोलभाव करेगी।’ मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली आरआईएल की सहायक कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने पिछले साल अगस्त में घोषणा की थी कि वह फ्यूचर समूह से खुदरा, थोक, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग कारोबार 24,713 करोड़ रुपये में खरीद रही है। योजना के मुताबिक एफआरएल, फ्यूचर कंज्यूमर्स, फ्यूचर सप्लाई चेन सॉल्यूशंस, फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन, फ्यूचर ब्रांड्स और फ्यूचर मार्केट नेटवर्क जैसी कंपनियों का सबसे पहले फ्यूचर एंटप्राइजेज लिमिटेड में विलय होना था। इसके बाद खुदरा एवं थोक कंपनी का आरआरवीएल के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रिलायंस रिटेल ऐंड फैशन लाइफस्टाइल लिमिटेड में हस्तांतरण होना था। साथ ही लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग कंपनी का हस्तांतरण आरवीवीएल को होगा। लेकिन जब दोनों कंपनियां विलय प्रस्ताव की मंजूरी हासिल करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में गईं तो फ्यूचर के प्रवर्तक की कंपनी में हिस्सेदारी रखने वाली एमेजॉन सर्वोच्च न्यायालय में चली गई। इस वजह से यह सौदा अभी अटका हुआ है। लेकिन बैंकरों का कहना है कि यह देरी आरआईएल के लिए वरदान बन सकती है क्योंकि कंपनी फ्यूचर समूह की विभिन्न कंपनियों की निराशाजनक बिक्री के अनुमानों का हवाला देकर सौदे पर नए सिरे से मोलभाव कर सकती है।