रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियां 31 मार्च 2021 को समाप्त तिमाही के दौरान राजस्व एवं मात्रात्मक बिक्री के मोर्चे पर दमदार वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद कर रही हैं। तिमाही के दौरान वृद्धि को मुख्य तौर पर कमजोर आधार और विभिन्न श्रेणियों में दमदार मांग से सहारा मिलेगा। हालांकि जिंस कीमतों में तेजी की चिंता लगातार बनी हुई है। पिछले एक सप्ताह के दौरान विभिन्न कंपनियों द्वारा दिए गए संकेतों से यह साफ तौर पर जाहिर होता है।
मैरिको, गोदरेज कंज्यूमर (जीसीपीएल) और टाइटन ने चौथी तिमाही के लिए अपने अनुमान जारी किए हैं। इन कंपनियों ने तिमाही के दौरान राजस्व और मात्रात्मक बिक्री दोनों मोर्चे पर दो अंकों की दमदार वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद जताई हैं। हालांकि इन कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि इनपुट लागत पर दबाव के कारण परिचालन मार्जिन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है जिससे मुनाफा वृद्धि को झटका लगेगा।
मैरिको ने अपने तिमाही अनुमान में कहा है, ‘हम चौथी तिमाही के दौरान मुनाफे में निचले दो अंकों में वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद करते हैं क्योंकि इनपुट लागत पर दबाव के कारण परिचालन मार्जिन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।’
जीसीपीएल ने कहा कि उसने जिंस कीमतों में तेजी के प्रभाव से निपटने के लिए चौथी तिमाही के दौरान कीमतों में उपयुक्त वृद्धि की थी। हालांकि पिछले एक महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 10 फीसदी की गिरावट के साथ 63 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गईं लेकिन पाम ऑयल, कोपरा और चाय जैसे कृषि आधारित जिंस की कीमतों में तेजी बरकरार है।
पाम तेल का उपयोग साबुन बनाने के लिए किया जाता है जबकि कोपरा का उपयोग नारियल का तेल बनाने के लिए किया जाता है। दूसरी तरफ लीनियर अल्काइल बेंजीन (एलएबी) और हाई-डेंसिटी पॉलिथिन (एचडीपीई) सहित कच्चे तेल के बने उत्पाद एफएमसीजी उद्योग के लिए महत्त्वपूर्ण कच्चा माल हैं।
एलएबी का उपयोग डिटरजेंट बनाने में किया जाता है और डिटरजेंट की कुल इनपुट लागत में इसकी हिस्सेदारी लगभग 60 से 70 फीसदी होती है। एचडीपीई का उपयोग साबुन से लेकर डिटरजेंट तक, केश तेल, क्रीम, शैंपू और टूथपेस्ट जैसी आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के लिए पैकेजिंग सामग्री में किया जाता है। इन उत्पादों की पैकेजिंग लागत कंपनियों के लिए समग्र उत्पादन लागत का 15 से 20 फीसदी तक है।
इनपुट लागत दबाव को कम करने के लिए एफएमसीजी कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों के दौरान विभिन्न उत्पादों की कीमतों में 5 से 7 फीसदी की वृद्धि की है। चाय की कीमतों में कहीं अधिक वृद्धि दिख रही है जो 10 से 15 फीसदी के दायरे में है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कहा कि कंपनियां जिंस कीमतों में तेजी के प्रभाव से निपटने की कोशिश कर रही हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में की गई वृद्धि यह पर्याप्त नहीं हो सकता है क्योंकि इनपुट लागत दबाव बरकरार है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों और ग्राहक धारणा पर उसके प्रभाव को देखते हुए कंपनियां अधिक मूल्य वृद्धि नहीं कर सकती हैं। कंपनियां मौजूदा समय में कीमत बढ़ाकर मांग की रफ्तार को सुस्त नहीं करना चाहती हैं।’
विश्लेषकों की उम्मीद जताई है कि लॉकडाउन संबंधी पाबंदियों के बीच कंपनियां आवश्यक श्रेणियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और पिछले साल देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान भी यही रुझान दिखा था। इसके अलावा घरों में खपत बढ़ेगी क्योंकि लोग घर पर रह रहे हैं। इससे खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ेगी। दूसरी ओर, पर्सनल केयर एवं घर से बाहर के उत्पादा श्रेणियों को झटका लग सकता है।