एफएमसीजी को मूल्यवृद्धि से दम

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:51 PM IST

दैनिक उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) की कंपनियों से उम्मीद की जा रही है कि वे दमदार राजस्व वृद्धि दर्ज करेंगी। ऐसा खास तौर पर दामों में किए गए इजाफे की वजह से है। कंपनियों नें जिंसों की अधिक कीमतों के कारण जनवरी-मार्च तिमाही में भी यह इजाफा जारी रखा है। हालांकि इस तिमाही में आवश्यक व्यय की तुलना में गैर-जरूरी व्यय में सुधार हुआ है, लेकिन ओमीक्रोन की लहर का असर जरूर पड़ा है।
मोतीलाल ओसवाल ने इस क्षेत्र के संबंध में अपने पूर्वावलोकन नोट में कहा है कि मार्च में समाप्त हुई तिमाही के दौरान मुद्रास्फीति विषय-वस्तु रही है, क्योंकि पहले से ही अधिक चल रही जिंसों की लागत को फरवरी में भड़के रूस-यूक्रेन संकट ने और बढ़ा दिया है।
मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 22 की तीसरी तिमाही में ज्यादातर कंपनियों द्वारा दामों में तीव्र वृद्धि किए जाने से कंपनियों का प्रबंधन पहले से ही दामों में और वृद्धि के संबंध में आशंकित, क्योंकि इससे मांग प्रभावित होने का खतरा था, क्योंकि इससे मांग पर असर पडऩे का जोखिम था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनपुट की बढ़ती लागत से अधिकांश एफएमसीजी कंपनियों को मार्जिन बचाने के लिए और दाम वृद्धि करने के लिए विवश होना पड़ा।
एमके ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आवश्यक वस्तुओं में मंदी इस तिमाही में जारी रही और उसका मानना ​​है कि जो कंपनियां गैर-जरूरी उत्पाद बेचती हैं, वे कंपनियां बेहतर प्रदर्शन दर्ज करेंगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मूल्य संबंधी कदम से कंपनियों को स्थिर वॉल्यूम के साथ उच्च एकल अंक की राजस्व वृद्धि दर्ज करने में मदद मिलनी चाहिए।
अपने तिमाही रिपोर्ट में मैरिको ने भी निवेशकों को बताया है कि जनवरी-मार्च तिमाही में उसका राजस्व उच्च एकल अंक में है। इसमेंं यह भी कहा कि इसका सकल मार्जिन पिछले साल की इसी तिमाही के समान स्तर पर रहने की उम्मीद है।
पैराशूट नारियल तेल की विनिर्माता ने देश में अपने वॉल्यूम के संबंध में टिप्पणी करते हुए कहा कि उसका वॉल्यूम असाधारण रूप से अधिक आधार (25 प्रतिशत) पर मामूली रूप से सकारात्मक है, जिससे दो साल के सीएजीआर के आधार पर दोहरे अंकों की मात्रात्मक वृद्धि हुई है।
इसका कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण बदतर होने वाली वैश्विक जिंसों में महंगाई और कमजोर ग्रामीण धारणा के बीच खपत की प्रवत्ति कमजोर रही है। इसने आगे कहा कि हालांकि कंपनियों ने लागत के आघात से निपटने के लिए एफएमसीजी की विभिन्न श्रेणियों में खासी दाम बढ़ोतरी की है, लेकिन अनवरत बनी हुई मुद्रास्फीति ने ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं की जेब को नुकसान पहुंचाना जारी रखा है। इसके परिणामस्वरूप सालाना आधार पर जनवरी-फरवरी की अवधि में एफएमसीजी के वॉल्यूम में गिरावट आई।

First Published : April 15, 2022 | 11:40 PM IST