इक्विटी में अच्छे जोखिम-प्रतिफल की संभावना है

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 3:50 AM IST

बीएस बातचीत
वैलिडस वेल्थ के मुख्य निवेश अधिकारी राजेश चेरुवू का कहना है कि ईपीएस वृद्घि अनुमानों में कटौती और ऊंची मुद्रास्फीति भारतीय बाजारों के लिए बड़े जोखिम हैं। उन्होंने ऐश्ली कुटिन्हो के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि आसान मौद्रिक हालात में उम्मीद के मुकाबले बेहतर तेजी से तरलता में कमी आ सकती है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

मौजूदा समय में भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सबसे बड़े जोखिम क्या हैं?
इक्विटी बाजार हमेशा से आगे की ओर देखते रहे हैं और उनमें सूक्ष्म आर्थिक व्यवधानों से तुरंत बाहर निकलने की प्रवृत्ति होती है। लेकिन जब मूल्यांकन पर दबाव हो, जैसा कि मौजूदा समय में दिख रहा है, तो कंपनियों के पास व्यावसायिक प्रदर्शन और आय डिलिवरी में गलतियों के लिए गुंजाइश नहीं रहती। हालांकि दो वर्षीय आगामी ईपीएस आय अभी भी मजबूत है, लेकिन स्थानीय तौर पर लॉकडाउन फिर से लगने की आशंका और बड़ी आबादी को जल्द टीका लगाने की सरकार की क्षमता को लेकर अनिश्चितता से वित्त वर्ष 2022 की वास्तविक जीडीपी वृद्घि सालाना आधार पर 12-13 प्रतिशत से घटकर 8-10 प्रतिशत रहने का अनुमान है।  इसलिए, उम्मीद से कमजोर वृहद हालात की वजह से ईपीएस वृद्घि अनुमानों के लिए डाउनग्रेड सबसे बड़ा जोखिम है। दूसरा जोखिम मुद्रास्फीति को लेकर है। तीसरा, आसान मौद्रिक स्थिति में उम्मीद से तेज बदलाव (स्थानीय और वैश्विक तौर पर, दोनों) से संबंधित है, क्योंकि इससे तरलता में कमी आ सकती है।

मूल्यांकन पर आपका क्या नजरिया है?
इसमें कोई संदेह नहीं है कि संपूर्ण आधार पर मूल्यांकन सभी मानकों पर दीर्घावधि औसत के मुकाबले ऊंचा है, चाहे यह पीई, पीबी हो या जीडीपी के संदर्भ में बाजार पूंजीकरण। लेकिन जब सापेक्ष आधार पर देखा जाए तो डेट मूल्यांकन भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। मुद्रास्फीति जोखिम के साथ इक्विटी ने मध्यावधि से दीर्घावधि के दौरान उचित प्रतिफल देने के लिए श्रेष्ठ रिस्क-रिवार्ड की पेशकश की है।

आप आर्थिक गतिविधि पर दूसरी लहर के प्रभाव का आकलन कैसे करते हैं?
पहली तिमाही में कम आधार (अप्रैल-मई 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन) का लाभ मिला था और सालाना आधार पर मजबूत 25 प्रतिशत वृद्घि दर्ज किए जाने की उम्मीद जताई गई थी, जिससे वित्त वर्ष 2022 के लिए 12-13 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्घि को बढ़ावा मिला। संक्रमण के मामलों में पुन: तेजी आने से अप्रैल में लगभग सभी राज्यों में कफ्र्यू और स्थानीय तौर पर लॉकडाउन को बढ़ावा मिला, जो मई में भी बरकरार रहा। वाहन बिक्री, ईंधन मांग, रेल माल ढुलाई और संपत्ति पंजीकरण जैसे वृहद आर्थिक संकेतकों में मार्च के मुकाबले मासिक आधार पर गिरावट आई है। मोबिलिटी संकेतक भी कमजोर दिखे हैं और बेरोजगारी में इजाफा हुआ है। मोबिलिटी संकेतक फरवरी तक अच्छी रिकवरी दिखा रहे थे। इसके परिणामस्वरूप, पहली तिमाही को दूसरी लहर के प्रभाव का सामना करना पड़ रहा है और पूरे वर्ष के जीडीपी अनुमानों में खासकर तब तक कमी की गई है, जब तक कि टीकाकरण की तीसरा चरण तेजी से क्रियान्वित नहीं हो जाता।

मिडकैप और स्मॉलकैप पर आप क्या कहना चाहेंगे?
मिडकैप बेहतर मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं और ऊंचे ईपीएस अपग्रेड दर्ज कर रहे हैं। इसे देखते हुए हम लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप पर ओवरवेट नजरिया बनाए हुए हैं। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों को बड़े पूंजी प्रवाह से लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि स्थानीय बाजारों में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है।

आप किन क्षेत्रों पर दांव लगा रहे हैं?
हमारा मानना है कि अच्दी गुणवत्ता वाले क्षेत्रों की कंपनियां कोविड से बचने में सक्षम हैं, लेकिन यदि आप किसी खास क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं तो को-सैटेलाइट दृष्टिकोण पर ध्यान देना जरूरी होगा। कोर (70-75 प्रतिशत) में मजबूत वृद्घि वाले व्यवसायों के लिए आवंटन और सैटेलाइट (25-30 प्रतिशत) ध्यान फार्मा, आईटी सेवाओं, पीएलआई जैसे 6-12 महीने के नजरिये के साथ अल्पावधि थीम के आइडिया पर ध्यान देना शामिल होगा। लेकिन निवेशकों को इस तथ्य पर ध्यान देना होगा कि
गैर-कोर आवंटन बाई-ऐंड-होल्ड नहीं हैं और संभावित बदलाव  के बाद तुरंत इनसे बाहर निकल जाना चाहिए।

First Published : June 9, 2021 | 11:45 PM IST