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मंदी में भी ट्रेनिंग पर है जोर

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Last Updated- December 10, 2022 | 6:34 PM IST

भारतीय आईटी-बीपीओ कंपनियां कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर होने वाले खर्च में जबरदस्त इजाफा कर रही हैं। मंदी के इस दौर में इस सेक्टर की कंपनियां प्रशिक्षण और शिक्षण कार्यक्रमों पर खर्चे में 30 से 70 फीसदी का इजाफा कर रही हैं।
बीपीओ कंपनी ईएक्सएल सर्विसेज में 2007 के मुकाबले पिछले साल कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए 75 फीसदी ज्यादा पैसे निवेश किए गए। 

कंपनी के मुख्य कार्यकारी रोहित कपूर ने बताया कि, ‘इस पैसे का इस्तेमाल नए सेक्टरों और प्रोसेज में लोगों की कार्यकुशलता में इजाफा हो रहा है। हमने मैनेजमेंट और कर्मचारियों के क्षमताओं में सुधार लाने के लिए दी जा रही ट्रेनिंग पर अपना खर्च बढ़ा दिया है। हम खास तौर पर फाइनैंस, यूएस गैप और एसईसी के क्षेत्र में अच्छी टे्रनिंग पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।’
कंपनियां अब बाहर से लोगों को लेने के बजाए अच्छे कर्मचारियों के जरिये खाली कुसियों को भरने की कोशिश कर रही हैं। इस काम में ट्रेनिंग उनकी काफी मदद करता है। कपूर का कहना है कि बड़े पदों के लिए लोगों की 70 फीसदी जरूरत कंपनी अब अंदरुनी संसाधनों के जरिये ही पूरा कर ले रही है।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज में तो ट्रेनिंगों की तादाद में पिछले कुछ महीनों से 30 से 40 फीसदी का इजाफा हो चुका है। इस ट्र्ेनिंग का फोकस उपभोक्ताओं तक अच्छी सेवा मुहैया करवाना, बौध्दिक संपदा का निर्माण और साख बनाना है।
कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट एचआरे) दिलीप कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि, ‘हमने बैंकिंग, बीमा, रिटेल और दूसरे सेक्टरों में ट्रेनिंग में इजाफा किया है। साथ ही, अब तो हॉस्पिटैलिटी और लॉजिस्टिक सेक्टर से भी काफी मांग आ रही है। 

हम कर्मचारियों को जो ट्रेनिंग देते हैं, उसमें से 50 फीसदी से भी ज्यादा कार्यक्रम नए सौदों को ध्यान में रखते हुए कारोबार पर केंद्रीत होते हैं। इससे कर्मचारियों को आगे की जरूरत के लिए अभी से ही तैयार कर लिया जाता है।’
कंपनियों को लगता है कि इससे कर्मचारियों के कौशल में इजाफा होता है। साथ ही, इसके आधार पर वे लोग आगे चलकर बड़ी भूमिकाएं अदा कर सकते हैं। 

इससे उनकी कमाई में भी इजाफा होता है। उनके मुताबिक अगर आपकी ट्रेनिंग का दायरा काफी बड़ा है तो आपके पास अच्छे और कार्यकुशल लोगों की कभी कोई कमी नहीं होगी।
आईटी और बीपीओ कंपनियों ने अंदरुनी ट्रेनिंग में काफी इजाफा कर दिया है। साथ ही, बाहर से लोगों को टे्रनिंग दिलाने के लिए वे कंपनियों के साथ समझौता भी कर रही हैं।
 
विश्लेषकों का कहना है कि अलग-अलग कामों में माहिर कर्मचारियों को रखने से कंपनी के खर्च में कम से कम 30 फीसदी तक की गिरावट आ जाती है।
विप्रो के आईटी कारोबार के सहायक मुख्य कार्यकारी गिरीश परांजपे का कहना है कि, ‘अगर हमारे पास अलग-अलग काम में महारत रखने वाले कर्मचारी होंगे, तो जाहिर सी बात है कि हमें कम लोगों की जरूरत होगी। 

दो कामों के लिए दो लोगों को कम सैलरी पर रखने से बेहतर उन दोनों कामों में माहिर एक ही शख्स को अच्छी सैलरी पर रखना होता है। इससे न केवल कंपनी का खर्च कम होता है, बल्कि संस्थान में कार्यकुशलता भी बढ़ती है।’
विप्रो ने अपने आईटी और बीपीओ कारोबार से कुछ लोगों को चुना है, जो दोनों कामों को करने में काबिल हैं। इन्हें उसने ऐसे कामों में लगाया है, जहां इनके कौशल का पूरा इस्तेमाल किया जाता है।

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First Published - February 27, 2009 | 11:09 PM IST

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