वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद अगले हफ्ते प्रस्तावित बैठक में राज्यों के अंदर सोना तथा बहुमूल्य रत्नों की आवाजाही के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था लागू करने की सिफारिश पर विचार कर सकती है।
मामले के जानकार शख्स ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल की अध्यक्षता वाली मंत्री-स्तरीय समिति ने इस बारे में सिफारिश की है जिसकी रिपोर्ट 28 और 29 जून को प्रस्तावित जीएसटी परिषद की बैठक में प्रस्तुत की जा सकती है।
मंत्री-स्तरीय समिति की रिपोर्ट में राज्य के अंदर सोने की आवाजाही पर ई-वे बिल लागू करने का अधिकार राज्यों को देने का प्रस्ताव किया गया है जबकि देशव्यापी इस तरह की व्यवस्था के विचार को खारिज कर दिया क्योंकि ऐसा करना व्यावहारिक नहीं होगा।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ई-व बिल जारी करने के लिए 2 लाख रुपये (बहुमूल्य धातुओं की कीमत) की न्यूनतम सीमा होनी चाहिए और राज्य को यह अधिकार होगा कि वे इस न्यूनतम सीमा से ऊपर की राशि तय कर सकें।
जीएसटी व्यवस्था के तहत माल की आवाजाही के लिए ई-वे बिल जारी करने की जरूरत होती है। वर्तमान में 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सभी माल की आवाजाही के लिए ई-बिल अनिवार्य है। हालांकि सोने को इससे अभी छूट मिली हुई है। अगर इस प्रस्ताव को जीएसटी परिषद में मंजूरी मिलती है तो इससे सोने की आवाजाही पर नजर रखने में मदद मिलेगी तथा कर चोरी और सोने की तस्करी रोकने में मदद मिलेगी। सोने को अक्सर महंगाई से बचाने के लिए हेज के तौर पर रखा जाता है और आर्थिक संकट के दौरान यह सुरक्षित माना जाता है।
समिति ने बिजनेस-टू-बिजनेस लेनदेन के लिए 20 करोड़ रुपये या उससे अधिक के कुल वार्षिक कारोबार वाले करदाताओं (सोने / बहुमूल्य रत्न की आपूर्ति) के लिए ई-चालान को अनिवार्य करने का भी सुझाव दिया।
इन सिफारिशों में गैर-पंजीकृत व्यक्तियों से पंजीकृत डीलरों/ज्वेलर्स द्वारा पुराने सोने की खरीद पर रिवर्स शुल्क प्रणाली के आधार पर जीएसटी लगाना भी शामिल था और इसे जीएसटी की फिटमेंट समिति को भेजा जा सकता है।
इसमें कहा गया है कि ई-वे बिल के केवल भाग ए (आपूर्ति किए गए सामान की मात्रा और मूल्य) को भरने की ऐसी आवश्यकता होगी जिससे कि भाग बी (परिवहनकर्ता के विवरण) को भरने की आवश्यकता न हो।
इसके अलावा, सोने/बहुमूल्य रत्नों की अंतर-राज्यीय आवाजाही के लिए ई-वे बिल जारी करने के तौर-तरीके, जीएसटी-नेटवर्क के सुझाव के अनुसार होंगे। एक बार जब राज्य ई-वे बिल को लागू करने का फैसला करते हैं तब इसका मतलब यह भी है कि उन्होंने उनके द्वारा अधिकृत क्षेत्राधिकार आयुक्त के साथ परामर्श की प्रक्रिया का पालन किया है।
बहुमूल्य धातुओं या अन्य सामानों को ले जाने के लिए ई-वे बिल की जरूरत पर अमल करने की व्यावहारिकता और कर चोरी को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक तरीकों और तंत्रों का सुझाव देने के लिए परिषद द्वारा 2019 में एक उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया गया था। यह प्रस्ताव शुरू में केरल द्वारा दिया गया था जिसने जीएसटी की शुरुआत के बाद बहुमूल्य धातु से राजस्व में भारी कमी का संकेत दिया था। मंत्री समूह ने विभिन्न स्त्रोतों से राजस्व संग्रह, आयात, निर्यात, खपत, मूल्य रुझान और सोने की तस्करी के अनुमान के आंकड़ों की जांच की है।