विशेषज्ञ समिति ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और जुवेंटस हेल्थकेयर समेत कुछ कंपनियों को पहले से मौजूद दवाओं के कोविड के इलाज में उपयोग के चिकित्सकीय परीक्षण की मंजूरी दी है। इन दवाओं में इरेक्टाइल डिसफंक्शन दवा और गठिया की दवा भी शामिल हैं। मुंबई की जुवेंटस हेल्थकेयर और हैदराबाद की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) को हाल में विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) से एविप्टाडिल इंजेक्टेबल फॉम्र्यूलेशन के तीसरे चरण के परीक्षण की मंजूरी मिली है। एविप्टाडिल का इस्तेमाल इरेक्टाइल डाइफंक्शन के इलाज में होता है। इसे कोविड-19 के मरीजों में श्वास लेने में परेशानी के इलाज में उपयोगी पाया गया है। अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (यूएसएफडीए) ने आपात स्थिति में कोविड-19 के मरीजों पर इस दवा के इस्तेमाल को मंजूरी दी है। न्यूरोआरएक्स और रिलीफ थेराप्यूटिक्स ने आरएलएफ 100 नामक दवा विकसित करने के लिए साझेदारी की है। इस दवा में एंटी-इन्फ्लामेटरी और एंटी-साइटोकाइन गुण हैं। जब इस दवा का कोविड-19 के मरीजों पर इस्तेमाल किया गया तो इन्फ्लामेटरी मार्कर्स में सुधार दिखा और फेफड़ों के एक्स-रे में निमोनिया के साफ लक्षण दिखे।
अब जुवेंटस और डीआरएल को भारत में परीक्षणों की मंजूरी दी गई है। विषय विशेषज्ञ समिति ने कहा कि जुवेंटस ने समिति के सामने तीसरे चरण का संशोधित परीक्षण प्रोटोकॉल पेश किया है और इसने व्यापक विचार-विमर्श के बाद दवा के तीसरे चरण के परीक्षणों को मंजूरी दी है। हालांकि इसमें यह शर्त रखी गई है कि आईसीयू से मरीजों के डिस्चार्ज के मापदंड प्रोटोकॉल में स्पष्ट रूप से परिभाषित हों। समिति ने डीआरएल को लेकर कहा कि क्लीनिकल परीक्षण को पहले या दूसरे चरण के परीक्षणों के बजाय तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण करार दिया जाए। एक अन्य दवा कोल्चिसीन का इस्तेमाल गठिया में होता है। इसका परीक्षण भी कोविड-19 मरीजों के इलाज में होने जा रहा है। तेलंगाना स्थित लक्साई लाइफ साइंसेज को इस दवा के दूसरे चरण के परीक्षण की मंजूरी दी गई है। इसके लिए ये शर्तें रखी गई हैं कि मरीजों को शामिल करने के लिए उनके ब्लड प्रेशर जैसी चीजों को मापा जाना चाहिए और डिस्चार्ज के मापदंड निर्धारित किए जाएं। इससे पहले कनाडाई शोधार्थियों ने कहा था कि गठिया की दवा कोल्चिसीन के इस्तेमाल से कोविड-19 मरीजों की मृत्यु या अस्पताल में भर्ती की जरूरत का जोखिम 21 फीसदी कम हो जाता है।
एसईसी ने कोवोवैक्स और इंट्रा-नैसल टीकों पर ज्यादा ब्योरे मांगे
पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) से कहा गया है कि वह कोवोवैक्स टीके पर क्लीनिकल परीक्षण करने के लिए विषय विशेषज्ञ समिति के सामने संशोधित क्लीनिकल परीक्षण प्रोटोकॉल पेश करे। यह टीका उम्मीदवार नोवावैक्स ने विकसित किया है और इसका भारत में भी क्लीनिकल परीक्षण होगा और यहां एसआईआई साझेदार होगी। एसईसी ने कहा है कि एसआईआई प्रस्तावित अध्ययन प्रायोगिक दवा या टीके के साथ करे। इस तरह एसआईआई ने आगे के विचार-विमर्श के लिए समिति के सामने संशोधित क्लीनिकल परीक्षण प्रोटोकॉल पेश किया है। इस बीच भारत बायोटेक ने चिपैंजी एडीनोवायरस वेक्टर्ड कोविड-19 टीके के लिए जानवर विषाक्तता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के आंकड़े और पहले और दूसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण प्रोटोकॉल पेश किया है। इस टीके का कोड नाम बीबीवी154 है। यह इस कंपनी द्वारा विकसित नाक से दिया जाने वाला टीका है।
एसईसी ने कहा कि प्रोटोकॉल के मुताबिक कंपनी को प्रस्तावित खुराकों मेंं पहले चरण के क्लीकिल परीक्षण (75 विषय) में सुरक्षा और रोग प्रतिरोधक क्षमता के आंकड़े सृजित करने चाहिए। भारत बायोटेक ने दूसरे चरण के परीक्षण पर आगे बढऩे की खातिर विचार-विमर्श के लिए आंकड़े सौंप दिए हैं। भारत बायोटेक को समिति के विचारार्थ संशोधित क्लीनिकल परीक्षण प्रोटोकॉल पेश करना होगा।