शानदार शामों और जश्न के मामले में शहंशाह कहलाने वाले विजय माल्या गर्दिश में भी सिकंदर बनने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं।
यूबी समूह के मुखिया माल्या ने महज 27 साल की उम्र में कारोबारी सल्तनत संभाली थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि एक दिन उनके कारोबार की आर्थिक हालत इतनी बिगड़ जाएगी।
यूबी समूह की 6 सूचीबद्ध कंपनियों पर दिसंबर 2008 में कुल 14,231 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो समूह के बाजार पूंजीकरण से भी ज्यादा है। जनवरी 2008 से अब तक 76 फीसदी गिरावट के साथ समूह का बाजार पूंजीकरण 9,527.74 करोड़ रुपये ही रह गया है। परिचालन के लिए मार्च 2008 में 354.52 करोड़ रुपये की नकदी कम रही।
दिलचस्प है कि इसके बावजूद पिछले 5 साल में समूह ने 8,000 करोड़ रुपये की रकम खर्च कर धुआंधार अधिग्रहण किए हैं। इनमें 1,500 करोड़ रुपये तो जून 2005 में शॉ वालेस खरीदने में खर्च हुए और मई 2007 में माल्या ने व्हाइट ऐंड मैके को 4,800 करोड़ रुपये में खरीदा।
आलोचकों के मुताबिक माल्या ने खतरे को अनदेखा किया, लेकिन उनके दरबारी इसे भविष्य के लिए सटीक कदम बताते हैं। बात जो भी हो, अब माल्या समूह की कुछ कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहे हैं और जमीन बेचने की योजना भी बनाई जा रही है।
व्हाइट ऐंड मैके में 49 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना पर भी विचार हो रहा है। इससे यूनाइटेड स्पिरिट के अधिग्रहण के वक्त लिए कर्ज को चुकाने में मदद मिलेगी। इस कर्ज की कुल रकम 2,300 करोड़ रुपये के करीब है। इस कंपनी की 15 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए शराब दिग्गज डियाजियो समेत कई कंपनियों से बातचीत चल रही है।
माल्या किंगफिशर एयरलाइंस के लिए निवेशक भी तलाश सकते हैं क्योंकि इस कंपनी की वजह से उनके समूह पर तगड़ा बोझ पड़ रहा है। पिछले साल दिसंबर में इस विमानन कंपनी पर तकरीबन 5,356 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ा हुआ था।
अलबत्ता माल्या का दावा है कि उनके सामने कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने स्पेन से बिजनेस स्टैंडर्ड से बात की और कहा, ‘कर्ज चुकाने का दबाव हम पर नहीं है क्योंकि इन्हें एक निश्चित अवधि में चुकाया जाना है।
कंपनियों का नकदी प्रवाह और मुनाफा भी कर्ज चुकाने के लिहाज से ठीक है। यह भी याद रखिए कि कर्ज अदायगी के मामले में मैं अब तक बेदाग रहा हूं और मुझे पता है कि मैं क्या कर रहा हूं। 2000 में भी लोगों ने कहा था कि यूबी डूब जाएगा, लेकिन मैंने कारोबारी दांव के जरिये सब कुछ बेहद आराम से सुलझा लिया।’