फ्यूचर से कर्ज वसूली मुश्किल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:32 PM IST

भारतीय ऋणदाता फ्यूचर समूह कंपनियों के तेजी से घट रहे परिसंपत्ति आधार को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इससे बकाया की वसूली प्रक्रिया आसान नहीं रह जाएगी। फ्यूचर समूह का परिसंपत्ति आधार लॉकडाउन और स्टोरों पर फ्यूचर समूह के पट्टे समझौते समाप्त होने के बाद प्रतिस्पर्धी रिलायंस रिटेल द्वारा 947 स्टोरों पर अधिग्रहण के कारण घट गया।  
बैंकों का कहना है कि उन्होंने दिवालिया अदालत से संपर्क किया है जिससे कि कानूनी प्रक्रिया के किसी तरह के दोहराव से बचा जा सके। एक बैंकर ने कहा, ‘चूंकि फ्यूचर समूह कंपनी एक रिटेल कंपनी है, इसलिए व्यवसाय वितरण को लेकर ज्यादा जोखिम है, क्योंकि परिचालन में उसे मुश्किल से ही कोई ताजा वित्तीय सहायता मिलेगी।’
बैंकर ने कहा, ‘निर्माण कंपनियों के विपरीत, रिटेल कंपनी के दिवालिया मामले में समान वसूली संभव नहीं है। निर्माण कंपनियों के मामले में विपरीत हालात में ऋणदाता अपना ऋण वसूलने के लिए उनके संयंत्रों और इमारतों को बेच सकते हैं।’
सूचीबद्घ कंपनी फ्यूचर एंटरप्राइजेज के स्वामित्व वाले बीमा संयुक्त उद्यमों में संभावित खरीदार कुछ दिलचस्पी दिखा सकते हैं, लेकिन यह ऋणदाताओं को बकाया वसूलने के लिहाज से पर्याप्त नहीं होगी। जनवरी में फ्यूचर एंटरप्राइजेज ने कहा कि वे फ्यूचर जेनेराली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में अपनी 25 प्रतिशत इक्विटी इतालवी भागीदार जेनेराली गु्रप को 1,253 करोड़ रुपये में बेच रही है। इस पूंजी से उसे अपना कर्ज चुकाने में मदद मिली थी। इस सौदे के बाद सामान्य बीमा कंपनी में फ्यूचर एंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत रह गई, जिसे बकाया वसूलने के लिए बैंकों द्वारा बेचा जा सकता है।
फ्यूचर जेनेराली इंडिया लाइफ में जेनेराली की भी 68 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे 2022 के अंत तक बढ़ाकर 71 प्रतिशत किया जाएगा। शेष हिस्सेदारी फ्यूचर एंटरप्राइजेज के पास बनी रहेगी।
इस घटनाक्रम से जुड़े एक ऋणदाता ने कहा, ‘आईबीसी सिर्फ बड़ी परिसंपत्ति वाले व्यवसायों के लिए उपयुक्त है और समाधान के बाद वैल्यू की कुछ बहाली होगी। लेकिन छोटे व्यवसायों में इस तरह का कुछ संभव नहीं है, क्योंकि उनके स्वयं के कुछ ही स्टोर होते हैं।’
फ्यूचर गु्रप कंपनियों की दिवालिया प्रक्रिया का मतलब होगा उसके शेयरधारकों की पूंजी को बड़ा नुकसान पहुंचना।
फ्यूचर के प्रमुख शेयरधारकों में शामिल हैं अमेरिकन रिटेल दिग्गज एमेजॉन, जिसने फ्यूचर कूपन में निवेश किया है। सोमवार को फ्यूचर रिटेल का शेयर भाव 5 प्रतिशत तक गिर गया था, क्योंकि चिंतित निवेशकों ने एनसीएलटी द्वारा ऋणदाताओं की याचिकाएं स्वीकार किए जाने की आशंका से प्रतिफल घट जाने की चिंता में फ्यूचर गु्रप के शेयरों में जमकर बिकवाली की। फ्यूचर समूह की सभी कंपनियों के शेयरों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई।
बैंकों का कहना है कि महामारी ने फ्यूचर समूह के ऑफलाइन रिटेल स्टोरों को प्रभावित किया, और यह दबाव स्पष्ट रूप से दिख रहा था। वर्ष 2019 में, फ्यूचर समूह ने प्रवर्तक इकाइयों के स्तर पर कोष जुटाया था और मार्च 2019 तक चार प्रमुख प्रवर्तक होल्डिंग कंपनियों का कुल कर्ज 11,970 करोड़ रुपये पर था।

First Published : April 26, 2022 | 1:00 AM IST